Jharkhand: एक साल से खराब जल मीनार अब बनी ‘मोबाइल चार्जिंग पॉइंट’, 30 परिवार प्यासे

चाकुलिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत जमुआ पंचायत से सरकारी तंत्र की उदासीनता की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जामडोहरी गांव के स्कूल टोला में लाखों की लागत से स्थापित सोलर जल मीनार पिछले एक साल से सफेद हाथी साबित हो रही है। जल मीनार का मोटर खराब होने के कारण यहाँ के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, लेकिन पिछले तीन दिनों से गांव में छाई ब्लैकआउट (बिजली कटौती) ने इस खराब सिस्टम को युवाओं के लिए ‘वरदान’ बना दिया है।ग्रामीण अब इस जल मीनार का उपयोग पानी के लिए नहीं, बल्कि अपने मोबाइल फोन को चार्ज करने के लिए एक ‘पब्लिक चार्जिंग स्टेशन’ के रूप में कर रहे हैं।

प्यास बुझाने के लिए कुआं ही एकमात्र सहारा

जल मीनार के खराब होने का सबसे बड़ा खामियाजा गांव के करीब 30 परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले एक साल से मोटर खराब पड़ी है, जिसके कारण पाइपलाइन के जरिए होने वाली जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। भीषण गर्मी के इस दौर में ग्रामीणों की प्यास अब केवल पुराने कुओं के भरोसे बुझ रही है। महिलाओं को दूर-दराज के कुओं से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।

बिजली गुल हुई तो काम आया ‘सोलर प्लेट’ का जुगाड़

जामडोहरी गांव में पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है। अंधेरे में डूबे गांव के युवाओं के सामने मोबाइल डिस्चार्ज होने की समस्या खड़ी हुई, तो उन्होंने खराब जल मीनार के सोलर पैनल का सहारा लिया। गुरुवार को गांव के युवा रवींद्र मांडी, धानो मांडी और जादू नाथ मांडी जल मीनार के पास बैठकर अपना मोबाइल चार्ज करते देखे गए।युवाओं ने बताया कि जब जल मीनार पानी देने के काम नहीं आ रही है, तो कम से कम इसके सोलर प्लेट से मोबाइल ही चार्ज कर लिया जाए ताकि दुनिया से संपर्क बना रहे।

जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर फूटा गुस्सा

ग्रामीणों का आरोप है कि जल मीनार की खराबी के बारे में पंचायत के जनप्रतिनिधियों को बार-बार सूचित किया गया है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। “एक साल का लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद मोटर की मरम्मत नहीं कराई गई है। जनप्रतिनिधियों को जनता की प्यास और उनकी परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है”।यह मामला न केवल चाकुलिया में पेयजल संकट की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे करोड़ों खर्च करने के बाद भी मेंटेनेंस के अभाव में सरकारी योजनाएं अपने मूल उद्देश्य से भटक जाती हैं। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद विभाग की नींद खुलती है या जामडोहरी के ग्रामीण इसी तरह ‘जुगाड़’ और ‘कुएं के पानी’ पर आश्रित रहेंगे।

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