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Bihar: बिहार में मिले दुर्लभ खनिजों के भंडार, जल्द शुरू होगी खनन प्रक्रिया

पटना: बिहार को लेकर अक्सर यह धारणा रही है कि झारखंड के अलग होने के बाद राज्य के पास खनिज संसाधन नहीं बचे। लेकिन इस धारणा को पूरी तरह बदलते हुए राज्य के खान और भू-तत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि बिहार में अत्यंत दुर्लभ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिज तत्वों का बड़ा भंडार मिला है, जिसके व्यावसायिक खनन की प्रक्रिया बेहद जल्द शुरू होने जा रही है।केंद्रीय खान मंत्रालय ने बिहार में ऐसे 14 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक्स की पहचान की है, जिनकी नीलामी प्रक्रिया इसी सप्ताह शुरू होने वाली है।

इन बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध हुआ बिहार

मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि बिहार की धरती के नीचे छिपे इस खजाने में दुनिया के सबसे महंगे और मांग वाले खनिज शामिल हैं। बांका जिला में कोबाल्ट का भंडार मिला है, जिसकी नीलामी की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके अलावा बांका के पिंडारक क्षेत्र में तांबे के भंडार भी मिले हैं, जिसका आकलन किया जा रहा है।भागलपुर जिला के बटेश्वरस्थान क्षेत्र में दुर्लभ मृदा तत्वों के महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। इसके साथ ही यहाँ क्रोमाइट के भंडार होने की भी प्रबल संभावना जताई गई है।जमुई जिला के सोनो क्षेत्र में सोने का विशाल भंडार होने के संकेत मिले हैं, जहाँ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा गहन अध्ययन और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। नवादा में वैनाडियम युक्त मैग्नेटाइट और इल्मेनाइट तथा रोहतास में ग्लॉकोनाइट के भंडार मिले हैं। इसके अलावा राज्य में पैलेडियम और टाइटेनियम की मौजूदगी भी दर्ज की गई है।

मिसाइल से लेकर स्मार्टफोन तक में होता है रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल

आखिर इन 17 प्राकृतिक धात्विक तत्वों के समूह यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?इनका उपयोग लड़ाकू विमान, मिसाइल गाइडेड सिस्टम, रडार, सैन्य ड्रोन और अत्याधुनिक सैन्य संचार उपकरणों को बनाने में होता है। हमारे दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी स्क्रीन, कैमरा लेंस, हार्ड डिस्क, स्पीकर और तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की बैटरी व मोटर्स में ये तत्व अनिवार्य रूप से इस्तेमाल होते हैं। ये तत्व पृथ्वी पर मौजूद तो हैं, लेकिन इनका सघन और आर्थिक रूप से दोहन करने लायक भंडार दुनिया में बहुत कम देशों (जैसे चीन) के पास है। ऐसे में बिहार में इसकी खोज भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक गेम-चेंजर कदम है।

20 मई के बाद शुरू होगी पहली नीलामी प्रक्रिया

बिहार की इस खनिज संपदा को धरातल पर उतारने और राजस्व जुटाने के लिए सरकार ने समय-सीमा तय कर दी है। केंद्र सरकार नवादा के एक और रोहतास जिले में ग्लॉकोनाइट के तीन खनन ब्लॉकों की नीलामी के साथ इस महाअभियान की शुरुआत करने जा रही है।सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित इकाई मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉरपोरेशन ने इसके लिए वैश्विक और घरेलू कंपनियों से खनन बोलियां आमंत्रित कर ली हैं। 20 मई 2026 के ठीक बाद आधिकारिक रूप से वित्तीय बोलियां और नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

दक्षिणी बिहार में चल रहा है हाई-टेक हवाई सर्वेक्षण

झारखंड की सीमा से सटे दक्षिणी बिहार के जिलों (जैसे गया, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर) में खनिज अन्वेषण की गतिविधियों को बेहद आधुनिक तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि छिपे हुए भंडारों का सटीक पता लगाने के लिए इसरो और भू-वैज्ञानिकों की मदद से विशेष विमानों के जरिए हवाई सर्वेक्षण कराया जा रहा है।सैटेलाइट इमेजरी (उपग्रह चित्रण) और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग हो रहा है।पुराने ब्रिटिश कालीन और हालिया आंकड़ों का जमीनी विश्लेषण कर मैपिंग की जा रही है।

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