Bengal: फलता सीट से टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार, सीएम शुभेंदु के ‘विशेष पैकेज’ का किया समर्थन

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संपन्न होने और भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद भी राजनीतिक उलटफेर का दौर थम नहीं रहा है। राज्य की बेहद चर्चित और विवादित फलता विधानसभा सीट पर होने वाले पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले टीएमसी के आधिकारिक प्रत्याशी जहांगीर खान ने अचानक चुनाव लड़ने से पैर पीछे खींच लिए हैं।जहांगीर खान के इस आत्मसमर्पण और पाला बदलने जैसी घोषणा के बाद फलता सीट पर अब भाजपा की जीत का रास्ता पूरी तरह साफ और मुकाबला एकतरफा हो गया है।
“मैं फलता का बेटा हूँ, सीएम शुभेंदु के विकास पैकेज के साथ हूँ”: जहांगीर खान
मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव से खुद को अलग करने का सनसनीखेज ऐलान किया। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा “मैं फलता की माटी का बेटा हूँ और मेरे लिए यहाँ की शांति और विकास सर्वोपरि है। हमारे नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी फलता क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक ‘विशेष आर्थिक पैकेज’ देने जा रहे हैं। मैं नहीं चाहता कि फलता के लोग विकास की मुख्यधारा से अलग रहें। इसीलिए मैं फलता निर्वाचन क्षेत्र में होने वाले पुनर्मतदान से खुद को पूरी तरह अलग कर रहा हूँ।”
21 मई को होना है पुनर्मतदान, चुनाव आयोग ने की थी सख्त कार्रवाई
बता दें कि फलता विधानसभा सीट को लेकर पिछले दिनों राज्य में भारी बवाल और हिंसक झड़पें देखने को मिली थीं। मुख्य चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को पुख्ता शिकायतें मिली थीं कि तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं द्वारा मतदाताओं को डराया-धमकाया जा रहा है और स्वतंत्र मतदान में बाधा डाली जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने फलता सीट के चुनाव को ही रद्द घोषित कर दिया था। आयोग के नए आदेश के मुताबिक, आगामी 21 मई 2026 को फलता सीट पर दोबारा मतदान होना तय है, जबकि 24 मई को इसके नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनावी शोर के बीच टीएमसी प्रत्याशी के इस फैसले ने पार्टी आलाकमान को सन्न कर दिया है।
बंगाल में ढह गया ममता बनर्जी का ‘किला’, 22 मंत्रियों की हुई शर्मनाक हार
पश्चिम बंगाल के इस हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और उसकी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अपने राजनीतिक इतिहास की सबसे करारी और शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बना ली है और ‘डबल इंजन सरकार’ का सपना पूरा किया है। ममता बनर्जी कैबिनेट के 22 कद्दावर मंत्रियों को जनता ने इस चुनाव में सिरे से नकार दिया और उन्हें अपनी सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा।
‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता को फिर चटाई धूल
भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के महानायक बनकर उभरे हैं शुभेंदु अधिकारी, जिन्हें पार्टी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी है। शुभेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। शुभेंदु अधिकारी ने न केवल दो अलग-अलग विधानसभा सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की, बल्कि वे एक बार फिर ‘जायंट किलर’ साबित हुए। टीएमसी का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाने वाली कोलकाता की भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी का सीधा मुकाबला खुद ममता बनर्जी से था। शुभेंदु ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में मात दे दी।
नंदीग्राम का इतिहास दोहराया
इससे पहले पिछले विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर पराजित किया था। ममता को बार-बार पटखनी देने वाले शुभेंदु अधिकारी अब मुख्यमंत्री के रूप में बंगाल में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासनिक कमेटियों के गठन पर काम शुरू कर चुके हैं।



