Bihar: विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला, सभी पुलों का होगा सेफ्टी ऑडिट

पटना/भागलपुर : भागलपुर में 3-4 मई की दरम्यानी रात विक्रमशिला सेतु का 33 मीटर लंबा कंक्रीट स्लैब गंगा नदी में समा जाने के बाद बिहार सरकार ‘एक्शन मोड’ में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न केवल प्रभावित स्थल का हवाई सर्वेक्षण किया, बल्कि राज्य के सभी पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘सेफ्टी ऑडिट’ का ऐतिहासिक आदेश भी जारी कर दिया है।

मुख्यमंत्री की चेतावनी: “लापरवाही हुई तो नपेंगे अधिकारी”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में लापरवाही के कारण कोई पुल क्षतिग्रस्त होता है, तो इसके लिए संबंधित कार्यपालक अभियंता से लेकर मुख्यालय स्तर के अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिहार के हर कोने में लोग सुरक्षित तरीके से पहुंच सकें, यह सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

पथ निर्माण विभाग की हाई-लेवल मीटिंग

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। सचिव ने दोहराया कि खराब गुणवत्ता और लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों के खिलाफ कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बिहार के सभी छोटे-बड़े पुलों के स्वास्थ्य की जांच के लिए रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

विक्रमशिला सेतु: आईआईटी पटना की टीम ने शुरू की जांच


दुर्घटनाग्रस्त विक्रमशिला सेतु को लेकर मरम्मत कार्य की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।पटना आईआईटी के इंजीनियरों की तीन सदस्यीय टीम ने तीन दिनों तक पुल के सभी स्लैब की गहनता से जांच की है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुल की मरम्मत में लगभग तीन महीने का समय लगेगा। मरम्मत कार्य पूर्ण होने और सुरक्षा प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही इस महत्वपूर्ण सेतु पर दोबारा आवागमन शुरू किया जाएगा।

क्यों जरूरी है सेफ्टी ऑडिट?

पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पुलों के क्षतिग्रस्त होने की छिटपुट घटनाओं ने बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। सम्राट चौधरी सरकार का यह ‘सेफ्टी ऑडिट’ का फैसला न केवल भविष्य के हादसों को रोकने में मददगार होगा, बल्कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।

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