जयपुर: 13 मई 2008 को हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े जिंदा बम मामले में दोषियों को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा स्थगन की याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि दोषियों को उम्रकैद की सजा जेल में ही काटनी होगी। यह फैसला 1 मई को जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने सुनाया।
2008 के धमाकों ने हिला दिया था देश
13 मई 2008 की शाम जयपुर के परकोटा इलाके में सिलसिलेवार 8 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में करीब 80 लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा एजेंसियों को एक जिंदा बम भी मिला था, जिसे समय रहते निष्क्रिय कर बड़ी त्रासदी टाल दी गई थी।
चार दोषियों को सुनाई गई थी उम्रकैद
जिंदा बम मामले में जयपुर पुलिस ने सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद को गिरफ्तार किया था। विशेष अदालत ने सुनवाई के बाद चारों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।हालांकि, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद ने सजा पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
कोर्ट ने क्यों ठुकराई याचिका?
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा स्थगित करने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर आतंकी मामलों में राहत देने से न्याय के सिद्धांत प्रभावित होंगे।
हनुमान मंदिर के पास मिला था जिंदा बम
धमाकों के दिन चांदपोल स्थित हनुमान मंदिर के पास एक संदिग्ध वस्तु मिली थी। जांच में यह जिंदा बम निकला, जिसे बम निरोधक दस्ते ने फटने से महज 15 मिनट पहले निष्क्रिय कर दिया था। अगर यह विस्फोट होता, तो नुकसान और भी भयावह हो सकता था।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित
जयपुर बम धमाका केस में निचली अदालत ने पहले आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।फिलहाल पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
