लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर (मुंशीपुलिया के समीप) स्थित झुग्गी बस्ती में लगी आग ने भयानक मंजर पैदा कर दिया। इस हादसे में करीब 1000 झुग्गियां पूरी तरह जल गई हैं। देर रात जब प्रशासन ने राहत और तलाशी अभियान शुरू किया, तो मलबे से दो बच्चों के शव बरामद हुए, जिनकी उम्र लगभग दो साल के आसपास बताई जा रही है।
सिलेंडर धमाकों से दहला इलाका
चश्मदीदों के अनुसार, आग की शुरुआत शाम करीब 4 बजे एक देशी शराब ठेके के पास स्थित कैंटीन से हुई। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप ले लिया। बस्ती में रखे लगभग 100 एलपीजी सिलेंडर और वहां खड़ी बाइकों की टंकियां एक-एक कर फटने लगीं। इन धमाकों ने आग की तीव्रता को इतना बढ़ा दिया कि धुएं का गुबार 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया। विशाल गौतम, धर्मेंद्र और मो. आसिफ जैसे सैकड़ों परिवारों की जीवन भर की कमाई कुछ ही मिनटों में राख हो गई।
चीख-पुकार और अपनों की तलाश
आग बुझने के बाद भी बस्ती में कोहराम मचा रहा। कोई अपने बच्चे को ढूंढ रहा था, तो कोई अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए रो रहा था। बेकाबू भीड़ और बदहवास परिजनों को रोकने के लिए सिविल डिफेंस के लोगों को मानव श्रृंखला बनानी पड़ी।हवा में फैले जहरीले और काले धुएं के कारण आसपास के मोहल्लों में रहने वाले लोगों को भी सांस लेने में तकलीफ हुई। राहत कार्य के लिए फायर ब्रिगेड के साथ SDRF और NDRF की टीमों को भी मोर्चा संभालना पड़ा।
दो बच्चों की मौत, शिनाख्त जारी
डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन तलाशी के दौरान दो मासूम बच्चों की लाशें मिली हैं। पुलिस अब फोटो के माध्यम से उनके माता-पिता और परिजनों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि आग लगने के वक्त मची भगदड़ में बच्चे झोपड़ियों के अंदर ही फंस गए होंगे।
खुले आसमान के नीचे रात
बस्ती के लोग अब दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। प्रशासन ने कुछ लोगों को रैन बसेरों में शिफ्ट किया है, लेकिन सैकड़ों लोग रात भर सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर रहे। गुरुवार सुबह होते ही लोग राख के ढेर में अपना बचा-खुचा सामान और अपनों की निशानियां ढूंढते नजर आए।
