Entertainment: जुबिन गर्ग केस मामले में सिंगापुर कोर्ट से मिली ‘क्लीन चिट’ पर भारत में 4 लोगों पर हत्या का मुकदमा जारी

सिंगापुर/गुवाहाटी : उत्तर-पूर्व भारत के मशहूर गायक जुबिन गर्ग की पिछले साल सिंगापुर में हुई मौत के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सिंगापुर की एक कोरोनर कोर्ट ने विस्तृत जांच के बाद उनकी मौत को एक ‘दुर्भाग्यपूर्ण हादसा’ करार दिया है। कोर्ट ने इस मामले में किसी भी तरह की साजिश या आपराधिक मंशा की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

कोरोनर कोर्ट का फैसला: “नहीं मिला कोई दबाव”

स्टेट कोरोनर एडम नखोडा ने सिंगापुर पुलिस कोस्ट गार्ड की जांच रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए कहा कि जुबिन गर्ग को पानी में किसी ने धक्का नहीं दिया था।कोर्ट ने पाया कि जुबिन अपनी मर्जी से यॉट ट्रिप पर गए थे। जांच में सामने आया कि जुबिन ने घटना से पहले शराब (जिन, व्हिस्की और बियर) का सेवन किया था, जिससे शायद उनका निर्णय लेने का विवेक प्रभावित हुआ।नखोडा ने बताया कि यॉट के कप्तान के कहने के बावजूद जुबिन ने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था, जो उनकी मौत का एक बड़ा कारण बना।

भारत में स्थिति अलग: 4 लोगों पर हत्या का आरोप

सिंगापुर में भले ही इसे दुर्घटना मान लिया गया हो, लेकिन भारत में यह मामला अभी सुलझा नहीं है। असम के कामरूप महानगर जिले की सत्र अदालत में इस केस की सुनवाई जारी है भारत में चार लोगों पर जुबिन को जानबूझकर अत्यधिक शराब पिलाने और असुरक्षित स्थिति में तैरने के लिए उकसाने के आरोप में हत्या का मामला दर्ज है। इसी साल जनवरी में अदालत ने इन चारों मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

19 सितंबर 2025: वो काली रात

जुबिन गर्ग सिंगापुर में ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में परफॉर्म करने गए थे। यह आयोजन भारत और सिंगापुर के राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में होना था।परफॉर्म करने से ठीक एक दिन पहले 19 सितंबर 2025 को लजारस आइलैंड के पास समंदर में डूबने से उनका निधन हो गया।इस दुखद घटना के बाद पूरे फेस्टिवल को रद्द कर दिया गया था और उनके हजारों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई थी।

पत्नी ने उठाए थे सवाल

जुबिन की पत्नी ने सिंगापुर पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठाते हुए इसे एक गहरी साजिश बताया था। हालांकि, कोरोनर नखोडा ने स्पष्ट किया है कि पीसीजी ने मामले की गहराई से जांच की है और ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि बचाव करने वाले तैराकों ने उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की हो।

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