
इंदौर: मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और विवादित धार भोजशाला को लेकर सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट की बेंच में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस बहस के बाद कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले के अंतिम फैसले की ओर कदम बढ़ा चुका है। अदालत अब जमीनी हकीकत समझने के लिए स्वयं भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेगी।
2 अप्रैल से नियमित सुनवाई और कोर्ट का दौरा
जस्टिस की खंडपीठ ने इस मामले में कई कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।इस विवाद से जुड़ी सभी 5 याचिकाओं पर 2 अप्रैल से नियमित (डेली बेसिस) रूप से अंतिम बहस शुरू होगी। अंतिम बहस शुरू होने से पहले कोर्ट के जज स्वयं भोजशाला परिसर जाएंगे। अदालत ने साफ किया कि वहां सिर्फ जज ही जाएंगे, ताकि बिना किसी बाहरी प्रभाव के विवादित स्थल की वास्तविक स्थिति को समझा जा सके।सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा जुटाए गए सबूतों और रिपोर्ट का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा।
98 दिनों के सर्वे की रिपोर्ट पर टिकी नजरें
हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था।सर्वे में ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार, आधुनिक फोटोग्राफी और पुरातात्विक खुदाई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल हुआ।हिंदू पक्ष का कहना है कि सर्वे में मंदिर की प्राचीन संरचना के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने पारदर्शिता के लिए सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी और दृश्य साक्ष्य की मांग की है।
‘इंटरवीनर’ को लेकर कोर्ट का रुख
मामले में तीन अन्य पक्षों ने भी हस्तक्षेपकर्ता बनने की अपील की थी। इस पर कोर्ट ने कहा फिलहाल इन्हें ‘ऑडियंस’ के तौर पर रखा जाएगा।फाइनल आर्गुमेंट (अंतिम बहस) के समय कोर्ट इनकी दलीलों को भी सुनेगा।
क्या है भोजशाला विवाद?
धार स्थित भोजशाला को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत यहां शुक्रवार को नमाज और मंगलवार को पूजा की अनुमति है। अब 2 अप्रैल से होने वाली नियमित सुनवाई इस सदियों पुराने विवाद का स्थायी कानूनी समाधान निकाल सकती है।



