पटना: बिहार की राजधानी पटना से पुलिसिया संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने खाकी को शर्मसार कर दिया है। राम कृष्ण नगर थाना के इंचार्ज द्वारा एक पीड़ित पिता को दिए गए अपमानजनक बयान के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
“बेटी एक-दो महीने में ऐश-मौज कर लौट आएगी”
पूरा मामला एक नाबालिग लड़की की गुमशुदगी से जुड़ा है। जब पीड़ित पिता अपनी लापता बेटी की रिपोर्ट दर्ज कराने राम कृष्ण नगर थाने पहुंचे, तो न्याय मिलने के बजाय उन्हें थानेदार के कड़वे बोल सुनने पड़े।थाना प्रभारी ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय पीड़ित पिता से कहा, “बेटी एक-दो महीने में ऐश-मौज कर वापस आ जाएगी।इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने न केवल पीड़ित परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डीजीपी विनय कुमार का कड़ा एक्शन
जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए पुलिस मुख्यालय तक पहुँचा, डीजीपी विनय कुमार ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार पुलिस में ऐसे अधिकारियों के लिए कोई जगह नहीं है जो जनता की भावनाओं का सम्मान नहीं करते।
“इस तरह का बयान पूरी तरह गलत, असंवेदनशील और अस्वीकार्य है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”— विनय कुमार, डीजीपी, बिहार
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
राजधानी पटना के भीतर एक थाना प्रभारी का ऐसा आचरण पुलिस की ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ के दावों की पोल खोलता है। नाबालिगों की गुमशुदगी के मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सख्त निर्देश हैं कि तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाए, लेकिन यहाँ अधिकारी ने मामले को हल्के में लेकर पीड़ित को ही अपमानित कर दिया।
आगे की कार्रवाई
बताया जा रहा है कि डीजीपी के निर्देश के बाद पटना एसएसपी इस मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारी को निलंबित करने या लाइन हाजिर करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है।
