जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में इस वक्त उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति, टुसू पर्व और लोहड़ी को लेकर शहर के बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। साकची, बिष्टुपुर, मानगो और जुगसलाई जैसे प्रमुख बाजारों में तिल-गुड़ की खुशबू तैर रही है और ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
एक शहर, अनेक उत्सव: सांस्कृतिक एकता का संगम
जमशेदपुर की खूबसूरती इसकी विविधता में है, जो इस समय सड़कों पर साफ दिख रही है।बिहारी समुदाय मकर संक्रांति के रूप में मनाते हुए पवित्र नदियों में स्नान कर दही-चूड़ा और तिलकुट का आनंद लेंगे।आदिवासी और स्थानीय समाज प्रकृति पर्व ‘टुसू’ की तैयारियों में जुटे हैं, जहाँ चौड़ल और मां टुसू की प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है।पंजाबी समाज लोहड़ी की अग्नि जलाकर नई फसल और खुशहाली की कामना करेंगे।
गया के कारीगरों का ‘शुगर-फ्री’ तड़का
बाजारों में इस बार सबसे खास आकर्षण गया से आए कारीगरों द्वारा तैयार किए गए व्यंजन हैं।कारीगर गौरव ने बताया कि वे डेढ़ महीने पहले ही जमशेदपुर पहुंच गए थे। उनके द्वारा बनाए जा रहे गुड़ के तिलकुट, चीनी के तिलकुट, अनरसा और विभिन्न प्रकार के लड्डू लोगों को खूब लुभा रहे हैं।इस साल ‘इलायची युक्त गुड़ के तिलकुट’ और स्वास्थ्य के प्रति सचेत लोगों के लिए ‘शुगर-फ्री तिलकुट’ की भारी मांग है।गया से आए इन कारीगरों के लिए यह सीजन रोजगार का बड़ा जरिया बनता है, जिससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी हो जाती है।
स्नान, दान और खिचड़ी का महत्व
खरीदारी करने आए श्रद्धालुओं ने बताया कि मकर संक्रांति हिंदुओं का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है।”हमें साल भर इस दिन का इंतजार रहता है। सुबह नदियों में स्नान के बाद ब्राह्मणों को दान-पुण्य किया जाता है। दिन में दही-चूड़ा और रात में अदरक वाली विशेष खिचड़ी खाने की परंपरा है।”
शुभ कार्यों की होगी शुरुआत
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ही समाज में रुके हुए मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन आदि की विधिवत शुरुआत होगी। बाजारों में तिलकुट के साथ-साथ चूड़ा, गुड़, मुरही के लड्डू और तिलवा की दुकानों पर पैर रखने की जगह नहीं है।
