जमशेदपुर। झारखंड में जाति प्रमाण पत्र बनवाने की जटिल प्रक्रिया और खतियान की अनिवार्यता के कारण आम जनता को हो रही परेशानियों के खिलाफ भारतीय ओबीसी विचार मंच ने बिगुल फूंक दिया है। सोमवार को जमशेदपुर के साकची गोलचक्कर पर मंच की ओर से एक विशाल सभा का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने वर्तमान व्यवस्था पर कड़ा रोष जताया और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की।
खतियान की अनिवार्यता बनी गले की फांस
सभा को संबोधित करते हुए मंच के सदस्यों ने कहा कि पूर्व में जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया सरल थी, लेकिन वर्तमान में ‘खतियान’ की अनिवार्य मांग ने इसे अत्यंत जटिल बना दिया है। कई परिवारों के पास पुराने रिकॉर्ड या खतियान उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उनके बच्चों को शिक्षा और नौकरी के लिए आवश्यक जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे बुरा असर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समाज के युवाओं और छात्रों पर पड़ रहा है।
समाधान के लिए ‘स्थानीय जांच समिति’ का प्रस्ताव
भारतीय ओबीसी विचार मंच ने सरकार के समक्ष एक ठोस विकल्प पेश किया है। मंच ने जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए स्थानीय स्तर पर एक निष्पक्ष जांच समिति का गठन किया जाए।यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से उस क्षेत्र का निवासी है और सामाजिक रूप से उसकी जाति सर्वविदित है, तो स्थानीय जांच के आधार पर ही उसे प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए। केवल खतियान न होने के कारण किसी पात्र व्यक्ति को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जाए।
मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा मांग पत्र
सभा के दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि इन मांगों को लेकर एक विस्तृत मांग पत्र तैयार कर जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। मंच के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो ओबीसी समाज चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को तेज करने के लिए बाध्य होगा।
एकजुटता का प्रदर्शन
साकची गोलचक्कर पर हुई इस सभा में बड़ी संख्या में ओबीसी समाज के लोग और विचार मंच के सदस्य उपस्थित रहे। सभा के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि समाज अपने अधिकारों और पहचान से जुड़े इस मुद्दे पर अब पीछे नहीं हटेगा।
