
भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को अवैध और लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे पार्टी का पूर्व नियोजित राजनीतिक षड्यंत्र बताया है।
चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना
मामले को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करने पहुंचा। पार्टी नेताओं का आरोप है कि उन्हें आयोग के कार्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन पायलट, के.सी. वेणुगोपाल सहित कई नेता चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
कांग्रेस का आरोप- लोकतंत्र और महिला प्रतिनिधित्व पर हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति कर रही है और अब मध्य प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का प्रश्न है।
‘नामांकन रद्द करना अवैधानिक’, कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन कानूनी रूप से रद्द नहीं किया जा सकता था। पार्टी ने इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने निष्पक्षता से कार्य नहीं किया और राजनीतिक दबाव में निर्णय लिया।पार्टी का यह भी कहना है कि हैदराबाद की अदालत से प्राप्त नोटिस का उल्लेख नहीं करना कोई आपराधिक या अयोग्यता का आधार नहीं बनता, इसलिए नामांकन रद्द करने का फैसला न्यायसंगत नहीं है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज
वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है और यह पूरा विवाद पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
चुनाव आयोग के रुख पर टिकी नजरें
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ मध्य प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।



