
बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सैयद वासित अली नामक पाकिस्तानी नागरिक को दबोचा है। आरोपी मूल रूप से कराची (पाकिस्तान) का रहने वाला है और पिछले चार दशकों से फर्जी पहचान के सहारे सुशीला विहार इलाके में रह रहा था।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी
नगर कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र राठौर को गुप्त सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध विदेशी नागरिक नुमाइश ग्राउंड की ओर जाने वाला है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रेलवे लाइन के पास घेराबंदी की और वासित को हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए, जिन पर बुलंदशहर का स्थानीय पता दर्ज था। कड़ाई से पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह कराची का नागरिक है और उसके पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट की फोटोकॉपी भी मिली है।
चार दशक पुरानी कहानी: मां के साथ आया था भारत
पूछताछ में वासित ने बताया कि वह अपनी मां बिलकिस और तीन बहनों के साथ करीब 40 साल पहले भारत आया था। उसकी मां ने बुलंदशहर के सेंथला निवासी एक व्यक्ति से निकाह किया था।
वीजा की अड़चन
वासित की बहनों को ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ मिल गया, लेकिन उसका आवेदन बार-बार खारिज होता रहा।वासित का आपराधिक इतिहास भी है। वह साल 2012 में मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र से विदेशी अधिनियम के तहत जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने वैध कागजात न मिलने पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेना शुरू किया।
सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर मददगार
बुलंदशहर के एसएसपी दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिन्होंने वासित की मदद की। उन लोगों और बिचौलियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य पहचान पत्र बनवाने में उसकी सहायता की।पुलिस जांच कर रही है कि 40 वर्षों के दौरान वह किन-किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसकी संलिप्तता किसी संदिग्ध गतिविधि में रही है।
कानूनी कार्रवाई
आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सरकारी विभाग अब उन दस्तावेजों की भी जांच कर रहे हैं जिनके आधार पर उसे भारतीय पहचान पत्र जारी किए गए थे।



