
उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियों के बीच गुरुवार को बड़ा बवाल देखने को मिला। सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में आ रहे करीब 400 मकानों को बचाने के लिए पिपली नाका और भैरवगढ़ इलाके के सैकड़ों रहवासी सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित लोगों ने पहले क्षेत्रीय विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा का घेराव किया और फिर भाजपा कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
“वोट दिया घर बचाने के लिए, तोड़ने के लिए नहीं”
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय भावुक हो गया जब कई महिलाएं अपने घर टूटने के डर से रोने-बिलखने लगीं। प्रदर्शनकारियों ने विधायक को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर वोट दिया था, लेकिन आज उन्हीं के आशियानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण के कारण कई मकानों का 10 से 20 फीट हिस्सा टूट रहा है, जिससे उनकी छत और रोजी-रोटी दोनों छिन जाएगी।
6 लेन की जगह 4 लेन सड़क बनाने की मांग
पिपली नाका से भैरवगढ़ तक होने वाले इस चौड़ीकरण के विरोध में लोगों ने भाजपा कार्यालय के बाहर धरना दिया। रहवासियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं जिसमे सड़क को 6 लेन की जगह 4 लेन तक ही सीमित रखा जाए।सड़क की चौड़ाई 100 फीट के बजाय 80 फीट की जाए ताकि मकानों को कम से कम नुकसान हो।नगर निगम द्वारा दिए गए 7 दिनों के नोटिस को तत्काल वापस लिया जाए।
विधायक ने कलेक्टर से की चर्चा
हंगामे को देखते हुए विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने कलेक्टर रौशन सिंह से फोन पर बात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि एक प्रतिनिधिमंडल को कलेक्टर से मिलवाया जाएगा और मानवीय आधार पर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, नगर निगम के नोटिस के बाद लोग डरे हुए हैं।
क्या है पूरा विवाद?
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन नगर निगम शहर की प्रमुख सड़कों को चौड़ा कर रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार पहले सड़क को 150 फीट चौड़ा करने का प्रस्ताव था।लोगों के विरोध के बाद इसे घटाकर 100 फीट किया गया।नगर निगम ने मंगलवार को पिपली नाका से भैरवगढ़ जेल चौराहा तक के मकान मालिकों को नोटिस जारी कर 7 दिन में जगह खाली करने को कहा है।
जनस्वास्थ्य और आजीविका पर संकट
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि वे मजदूरी कर परिवार चलाती हैं। मकानों के टूटने से वे पूरी तरह बेघर हो जाएंगी। फिलहाल, भाजपा कार्यालय के बाहर करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद प्रशासन के आश्वासन पर लोग शांत हुए, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और उग्र होगा।



