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Rajasthan : राजस्थान में RGHS घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, 7 डॉक्टर निलंबित

राजस्थान गर्वमेंट हेल्थ स्कीम में फर्जीवाड़े और सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। मेडिकल एंड हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को सात डॉक्टरों को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई RGHS परियोजना निदेशक की अनुशंसा पर की गई है।सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आया कि कुछ डॉक्टरों ने निजी डायग्नोसिस सेंटर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के विभिन्न जांचें लिखीं, जिससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ा। मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी किए।


सीकर मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों पर गिरी गाज


निलंबित किए गए सभी डॉक्टर सीकर मेडिकल कॉलेज से अटैच अस्पताल और जिले के विभिन्न पीएचसी-सीएचसी में नियुक्त हैं। कार्रवाई की जद में सीकर मेडिकल कॉलेज से अटैच अस्पताल के अधीक्षक डॉ. कमल कुमार अग्रवाल भी शामिल हैं।इसके अलावा सह आचार्य डॉ. सुनील कुमार ढाका, डॉ. मुकेश वर्मा, एसके हॉस्पिटल के डॉ. गजराज सिंह, डॉ. एस.एस. राठौड़, डॉ. सुनील शर्मा और सीकर के किरवा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत डॉ. राकेश कुमार को भी सस्पेंड किया गया है।एक साथ सात डॉक्टरों पर हुई इस कार्रवाई से चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है।

परियोजना निदेशक की रिपोर्ट पर कार्रवाई


सूत्रों के मुताबिक RGHS की परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल ने विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर मेडिकल एंड हेल्थ डिपार्टमेंट को सौंपी थी। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि कुछ मामलों में प्राइवेट डायग्नोसिस सेंटर को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अनावश्यक जांचें लिखी गईं।रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और दस्तावेजी रिकॉर्ड में कई खामियां पाई गईं। विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा को स्वीकार किया।


बिना जरूरत के लिखी गईं महंगी जांचें


मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। कई मरीजों को HbA1c, RA Factor और Procalcitonin जैसी महंगी जांचें लिखी गईं, जबकि मेडिकल रिकॉर्ड में इनकी आवश्यकता का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था।कुछ मामलों में T2DM (टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस) के लिए HbA1c टेस्ट दर्शाया गया, लेकिन संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध नहीं मिली। ओपीडी स्लिप पर भी परामर्श का उल्लेख नहीं पाया गया।जांच अधिकारियों का कहना है कि यह पैटर्न संकेत देता है कि योजनाबद्ध तरीके से अनियमितताएं की गईं, जिससे सरकारी योजना का दुरुपयोग हुआ।


RGHS की साख पर सवाल


राजस्थान सरकार द्वारा कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस उपचार सुविधा देने के उद्देश्य से RGHS लागू की गई है। ऐसे में इस योजना में फर्जीवाड़े की खबर सामने आने से इसकी साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई व्यापक जांच की शुरुआत भर है। यदि आगे भी अनियमितताएं सामने आती हैं तो और भी कार्मिकों पर कार्रवाई हो सकती है।


आगे की प्रक्रिया


निलंबित डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद दोष सिद्ध होने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।मेडिकल एंड हेल्थ डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। RGHS जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को और सख्त किया जाएगा।इस कार्रवाई को स्वास्थ्य विभाग की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। फिलहाल पूरे मामले पर चिकित्सा जगत और प्रशासनिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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