Uttar Pradesh: रामपुर जेल से बाहर आते ही आजम खान और अब्दुल्ला को ईडी ने हिरासत में लिया, समर्थकों का हंगामा

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर में जिला जेल से बाहर आते ही समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने हिरासत में ले लिया। दोनों को गाड़ी में बैठाने के दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इस दौरान आजम खान की ईडी अधिकारियों से बहस होने की भी जानकारी सामने आई है।घटना के बाद जेल के बाहर सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ जुटने लगी। स्थिति को देखते हुए पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया और आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। मौके पर समर्थकों के हंगामे के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

पैन कार्ड मामले में सजा निलंबित होने के बाद मिली थी रिहाई

आजम खान और अब्दुल्ला आजम की रिहाई के आदेश शनिवार को रामपुर जिला जेल प्रशासन को भेजे गए थे। उनके वकील मोहम्मद जुबैर खान के मुताबिक, पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से दोनों की सात-सात साल की सजा निलंबित किए जाने के बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं। इसके बाद संबंधित एमपी/एमएलए अदालत ने रिहाई के आदेश जारी किए थे।हालांकि, सजा निलंबित होने का अर्थ दोषसिद्धि समाप्त होना नहीं है। इस मामले में हाईकोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित की थी, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से किया था इनकार

रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति समित गोपाल ने रामपुर की अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा निलंबित करने का आदेश दिया था। इससे पहले अदालत ने दोनों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एनआई जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद की दलीलें सुनने के बाद 15 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

क्या है दो पैन कार्ड का मामला?

यह मामला अब्दुल्ला आजम के कथित तौर पर दो पैन कार्ड का इस्तेमाल करने से जुड़ा है। आरोप है कि दोनों पैन कार्ड में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी और उनका इस्तेमाल अनुचित लाभ लेने के लिए किया गया।इस मामले में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में रामपुर की अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश के मामले में दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी।जेल से रिहाई के बाद ईडी की कार्रवाई और उसके बाद समर्थकों की भीड़ जुटने से रामपुर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

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