Delhi: जामिया की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ के नारे, छात्रसंघ बहाली आंदोलन के बीच विवाद

नई दिल्ली: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन विवादित नारों के सामने आने के बाद नए विवाद में घिर गया है। विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘फ्री शरजील इमाम’, ‘आरएसएस गो बैक’ और ‘वीसी गो बैक’ जैसे नारे लिखे जाने की खबर सामने आई है। इन नारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ये नारे किसने लिखे थे।

13 दिनों से छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर प्रदर्शन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र 12 अक्टूबर से छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और आगामी चुनावों की समय-सारिणी घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन में शामिल कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ की व्यवस्था बहाल की जाए और चुनाव कराने की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए। छात्रसंघ वर्ष 2006 में भंग कर दिया गया था। इसके बाद से विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली नहीं हो सकी है।प्रदर्शन के बीच दीवारों पर विवादित नारे लिखे जाने की खबर सामने आने से आंदोलन को लेकर बहस तेज हो गई है।

दीवारों पर लिखे नारों को लेकर विवाद

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर की कुछ दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘फ्री शरजील इमाम’, ‘फ्री फिलिस्तीन’, ‘आरएसएस गो बैक’ और ‘वीसी गो बैक’ जैसे नारे लिखे होने की तस्वीरें सामने आई हैं। इन नारों को लेकर विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताई है।हालांकि, इन नारों को लिखने वालों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं है। कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस घटना से खुद को अलग बताते हुए आरोप लगाया है कि विवादित नारे लिखकर उनके आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर साधा निशाना

मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विपक्षी नेताओं से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।गिरिराज सिंह ने कहा कि देश को तोड़ने की बात करने वालों को जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने जामिया और शाहीन बाग का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के लोगों को ऐसे मामलों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।उनके बयान के बाद मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। हालांकि, दीवारों पर नारे लिखने वालों की पहचान और इस घटना के पीछे की मंशा जांच का विषय है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

जामिया प्रशासन ने परिसर की दीवारों पर विवादित नारे लिखे जाने की निंदा की है। प्रशासन के मुताबिक, घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि किसी छात्र की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।प्रशासन ने यह भी कहा है कि यदि इस घटना में बाहरी लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, दीवारों पर लिखे नारों को हटाने के लिए सफाई अभियान चलाया गया है। कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है।

आंदोलन में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर भी आरोप

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कुछ बाहरी लोग और राजनीतिक तत्व आंदोलन को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने में कठिनाई हो रही है। प्रशासन ने छात्रों से प्रदर्शन समाप्त कर बातचीत के माध्यम से अपनी मांगें रखने की अपील की है।दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र छात्रसंघ चुनाव की समय-सारिणी घोषित करने और अपनी अन्य मांगों पर ठोस निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में विवादित नारों का मामला छात्रसंघ बहाली के मुद्दे से अलग एक नई चुनौती बनकर सामने आया है।

अब जांच पर टिकी नजरें

जामिया परिसर में विवादित नारे किसने लिखे और क्या इस घटना का छात्र आंदोलन से कोई संबंध है, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की बात कह रहा है, जबकि छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है।मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा कि इस घटना में किन लोगों की भूमिका थी।

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