देवघर: देवघर मंडल कारा में पहली बार प्रकृति पर्व करमा का आयोजन किया गया। जेलर प्रमोद कुमार की पहल पर कारा परिसर में करम डाल स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान बंदियों और सुरक्षाकर्मियों ने सामूहिक रूप से करमा गीत गाए और पारंपरिक करमा नृत्य किया। गीत-संगीत और नृत्य से जेल परिसर में उत्सवी माहौल बन गया।
करम डाल स्थापित कर की गई पूजा
करमा पूजा के लिए जेलर प्रमोद कुमार ने करम डाल समेत पूजा सामग्री और प्रसाद की व्यवस्था कराई। इसके बाद कारा परिसर में करम डाल गाड़कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूजा के दौरान बंदियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रकृति पर्व करमा मनाया।
पारंपरिक परिधान में नजर आए बंदी
करमा पूजा के दौरान कई बंदी पारंपरिक परिधान धोती-गंजी में नजर आए। कुछ बंदियों ने सिर पर पगड़ी बांधी और गले में गमछा भी रखा था। पूजा के दौरान बंदियों और सुरक्षाकर्मियों ने मिलकर करमा गीत गाए।इसके बाद सभी ने करम डाल के चारों ओर घूमकर पारंपरिक करमा नृत्य किया। गीत-संगीत और नृत्य के कारण कारा परिसर का माहौल पूरी तरह उत्सवी हो गया।
पूजा के बाद बंदियों के बीच प्रसाद का वितरण
पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद बंदियों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। देवघर मंडल कारा में पहली बार करमा पूजा आयोजित होने से बंदियों ने सामूहिक रूप से पर्व मनाया और पारंपरिक संस्कृति से जुड़े आयोजन में हिस्सा लिया।
भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति से जुड़ा है करमा पर्व
जेलर प्रमोद कुमार ने बताया कि करमा भाई-बहन के प्रेम, आपसी स्नेह और प्रकृति से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस अवसर पर प्रकृति की पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।उन्होंने कहा कि जेल परिसर में पहली बार करमा पर्व मनाया गया। ऐसे आयोजनों से कारा परिसर में सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बनता है और बंदियों के बीच आपसी भाईचारे की भावना मजबूत होती है। साथ ही, इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करते हैं।
