Jharkhand: एमजीएम अस्पताल के पीछे झाड़ियों में दिखी गोह, जानिए कितना खतरनाक है यह बड़ा सरीसृप

जमशेदपुर: एमजीएम अस्पताल के पीछे झाड़ियों में शनिवार को एक बड़े सरीसृप के दिखाई देने से आसपास के लोगों में चर्चा शुरू हो गई। लोगों ने इसे गोह (इंडियन मॉनिटर लिज़र्ड) के रूप में पहचाना। गोह को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित हैं, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह जीव आमतौर पर इंसानों के लिए खतरनाक नहीं होता। हालांकि, जंगली जीव होने के कारण इससे दूरी बनाए रखना जरूरी है।भारत में पाई जाने वाली इस बड़ी छिपकली को बंगाल मॉनिटर के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम वरानस बेंगालेंसिस है।

गोह को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गोह को लेकर लोगों के बीच इसके जहरीले या बेहद खतरनाक होने जैसी कई धारणाएं हैं। हालांकि, यह सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करती और आमतौर पर मनुष्यों से दूर रहने की कोशिश करती है।इसके काटने की स्थिति में दर्द, सूजन या चोट हो सकती है। इसलिए इसे पकड़ने, घेरने या छेड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। किसी भी जंगली जीव को सुरक्षित दूरी से देखना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

भारत समेत कई देशों में पाई जाती है गोह

बंगाल मॉनिटर भारत के अधिकांश हिस्सों में पाया जाता है। इसके अलावा नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है।यह जंगलों और खेतों के अलावा झाड़ियों, चट्टानी इलाकों तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बाहरी हिस्सों में भी देखी जा सकती है। भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में कई बार यह आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास भी पहुंच जाती है।

1 से 1.5 मीटर तक हो सकती है लंबाई

एक वयस्क गोह की लंबाई करीब 1 से 1.5 मीटर तक हो सकती है। इसका शरीर मजबूत और पूंछ लंबी होती है। इसकी जीभ दो भागों में बंटी होती है, जो सांप की जीभ जैसी दिखाई देती है।इसका रंग सामान्यतः भूरा, धूसर या जैतूनी होता है और शरीर पर छोटे-छोटे धब्बे दिखाई दे सकते हैं।

कीड़े-मकोड़े से लेकर चूहे तक खाती है

गोह मांसाहारी सरीसृप है। यह कीड़े-मकोड़े, चूहे, मेंढक, छोटे पक्षी, अंडे और छोटी छिपकलियों को अपना भोजन बनाती है।इस वजह से यह पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खासकर खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में चूहों तथा अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में यह मददगार हो सकती है।

गोह दिखाई दे तो क्या करें?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गोह दिखाई देने पर लोगों को घबराने या उसे पकड़ने की कोशिश करने के बजाय उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखनी चाहिए। भीड़ लगाकर उसे घेरना या पत्थर मारना भी खतरनाक हो सकता है।यदि गोह किसी आबादी वाले क्षेत्र में फंस गई हो या लोगों के लिए परेशानी पैदा कर रही हो, तो संबंधित वन विभाग या स्थानीय वन्यजीव बचाव दल को सूचना देना उचित है।

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत सुरक्षा

भारत में गोह को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षण प्राप्त है। इसके शिकार, पकड़ने और अवैध व्यापार पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।वन विभाग की ओर से भी लोगों से अपील की जाती है कि जंगल या आबादी वाले क्षेत्रों में गोह दिखाई देने पर उसे नुकसान न पहुंचाएं और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दें।

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