Uttar Pradesh: मेरठ में आतंकी मोहम्मद जफर गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद से संपर्क और संदिग्ध नेटवर्क की जांच में जुटी एटीएस

मेरठ: आतंकवाद से जुड़े एक संदिग्ध मामले में गिरफ्तार मोहम्मद जफर से पूछताछ के बाद एटीएस ने उसके संपर्कों और संभावित नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार जफर के कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में होने और अन्य लोगों से जुड़े होने के साक्ष्य मिले हैं।रविवार को एटीएस ने बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले मोहम्मद जफर को मेरठ के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित एक मस्जिद से गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि वह करीब एक महीने पहले बिहार से मेरठ आया था।

पाकिस्तान बुलाकर ट्रेनिंग देने की थी कथित योजना

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि जफर को पाकिस्तान बुलाकर कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण देने की योजना थी। आरोप है कि उसे देश में पाकिस्तानी आतंकियों को शेल्टर और अन्य मदद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा था।एटीएस अब उसके संपर्कों और गतिविधियों की गहन जांच कर रही है।

सोशल मीडिया और मोबाइल से मिले अहम सुराग

जफर के फेसबुक और व्हाट्सएप अकाउंट का रिकॉर्ड एटीएस ने खंगाल लिया है। उसके मोबाइल फोन से भी कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।जांच एजेंसी को उससे जुड़े अन्य लोगों और संदिग्ध संपर्कों की जानकारी भी मिली है। बुलंदशहर में रहने वाले उसके बहनोई पर भी नजर रखी जा रही है।

मेरठ, हापुड़, सहारनपुर और बुलंदशहर के युवकों का बना था व्हाट्सएप ग्रुप

एटीएस की जांच में सामने आया है कि जफर ने कथित तौर पर मेरठ, हापुड़, सहारनपुर और बुलंदशहर के युवकों को जोड़कर एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था।अब जांच एजेंसी इस ग्रुप से जुड़े लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। जांच के आधार पर जफर से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ या कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

मदरसों में पढ़ाई और संपर्कों की भी जांच

जफर वर्ष 2017 में पढ़ाई के लिए मेरठ आया था और कोतवाली थाना क्षेत्र के एक मदरसे में पढ़ाई की थी। बाद में वह बिहार लौट गया था। वर्ष 2022 में वह दोबारा क्षेत्र में आया और अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहा।जांच एजेंसियां अब उसके संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने और अन्य स्थानों पर उसके संभावित नेटवर्क की जांच कर रही हैं। एटीएस की टीम जिले के अन्य मदरसों में पढ़ रहे संदिग्ध छात्रों और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े मामलों की भी जांच कर सकती है।

चंदे के इस्तेमाल और आतंकी साहित्य की जांच

जांच में आरोप है कि जफर मस्जिद के नाम पर चंदा एकत्र कर उसका इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद तक पहुंचाने के लिए कर रहा था। उसके पास से मिली एक किताब और अन्य सामग्री की भी जांच की जा रही है।एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि जफर के कथित संपर्क कब और कैसे स्थापित हुए तथा उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे।

जफर की गिरफ्तारी के बाद मदरसों के सत्यापन की मांग

जफर की गिरफ्तारी के बाद कुछ संगठनों ने मदरसों और वहां पढ़ने वाले छात्रों के सत्यापन की मांग उठाई है। अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने कहा कि यदि जांच में किसी संस्था या व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों के पुलिस सत्यापन की भी मांग की है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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