Bihar: पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जमानत के 1 मामले में न्यायिक अधिकारी पर कार्रवाई का आदेश

पटना: पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निचली अदालत के एक न्यायिक पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। मामला हत्या के प्रयास के आरोपी को नियमित जमानत दिए जाने से जुड़ा है।हाईकोर्ट ने आरोपी को दी गई जमानत रद्द करते हुए उसे दो सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष समर्पण करने का आदेश दिया है।

22 जुलाई 2024 को दी गई थी नियमित जमानत

मामले के अनुसार, निचली अदालत में अपर सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनात एक न्यायिक पदाधिकारी ने 22 जुलाई 2024 को दीघा थाना में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी धर्मेंद्र कुमार को नियमित जमानत दी थी।आरोपी पर पिस्तौल से गोली मारकर श्याम सुंदरी देवी के पुत्र मुकेश उर्फ गोपी को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप था।हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि पीड़ित की गंभीर इंज्यूरी रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद आरोपी को नियमित जमानत दे दी गई।

हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कर दो सप्ताह में सरेंडर का दिया आदेश

न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने श्याम सुंदरी देवी की ओर से दायर जमानत रद्द करने की याचिका को मंजूर करते हुए आरोपी की नियमित जमानत रद्द कर दी।हाईकोर्ट ने धर्मेंद्र कुमार को दो सप्ताह के भीतर समर्पण करने का निर्देश दिया है।

43 पन्नों के फैसले में जमानत आदेश पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने अपने 43 पन्नों के फैसले में जमानत दिए जाने के आधार पर गंभीर सवाल उठाए।फैसले में कहा गया कि जिन तथ्यों के आधार पर आरोपी को जमानत दी गई थी, वे चार्जशीट में मौजूद पीड़ित मुकेश की इंज्यूरी रिपोर्ट के विपरीत हैं।कोर्ट के अनुसार, पीएमसीएच के चिकित्सकों ने पीड़ित की चोट को गंभीर प्रकृति का माना था।

‘जब सुनवाई की तारीख नहीं थी तो रिहाई का आदेश कैसे पारित हुआ?’

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर भी सवाल उठाया कि 22 जुलाई 2024 को आरोपी की नियमित जमानत याचिका की सुनवाई की तारीख ही नहीं थी, तो उस दिन आरोपी को रिहा करने का आदेश किन परिस्थितियों में पारित किया गया।कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और आदेश को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

चीफ जस्टिस के पास रिकॉर्ड भेजने का आदेश

हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड और संचिकाओं को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के पास भेजने का निर्देश दिया है।इसके लिए हाईकोर्ट के महानिबंधक कार्यालय को मामले से संबंधित तमाम रिकॉर्ड कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।

न्यायिक जगत में फैसले की चर्चा

पटना हाईकोर्ट के इस फैसले की न्यायिक जगत में चर्चा हो रही है। जमानत आदेश को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणियों और संबंधित न्यायिक पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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