झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग की विशेष जांच टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन अभ्यर्थी, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड का एक कर्मचारी तथा जेपीएससी के एक पूर्व अध्यक्ष का कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल है।सीआईडी की इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 19 हो गई है।
मंगलवार रात तीन मुख्य दलाल भी हुए थे गिरफ्तार
इससे पहले मंगलवार देर रात सीआईडी ने इस कथित परीक्षा घोटाले में शामिल तीन प्रमुख दलाल (सोर्स एजेंट) को गिरफ्तार किया था।गिरफ्तार दलालों की पहचान उमेश कुमार,बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार के रूप में हुई है।जांच के अनुसार ये दलाल अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनके दस्तावेज और बड़ी रकम लेते थे तथा अपने नेटवर्क के माध्यम से यह जानकारी और पैसा परीक्षा संचालन एजेंसी तक पहुंचाते थे।
टीडीपीएल अधिकारियों से पूछताछ में खुला नेटवर्क
सीआईडी की जांच में सामने आया है कि इन दलालों के संबंध टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी से जुड़े हुए थे।हाल ही में दोनों अधिकारियों से रिमांड पर पूछताछ के दौरान दलालों के नेटवर्क और कथित भूमिका का खुलासा हुआ। इसके बाद सीआईडी ने अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच करते हुए तीनों दलालों को रांची से गिरफ्तार किया।
छापेमारी में मिले अहम डिजिटल साक्ष्य
सीआईडी ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए हैं।बरामद सामग्री में शामिल है अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र,ओएमआर शीट,मार्कशीट,अन्य संदिग्ध दस्तावेज,डिजिटल डिवाइस एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन साक्ष्यों से परीक्षा में कथित सेटिंग और परिणाम में हेरफेर से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
22 जुलाई को दर्ज हुई थी प्राथमिकी
इस मामले में सीआईडी ने 22 जुलाई 2026 को सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच जारी, और गिरफ्तारी की संभावना
सीआईडी अधिकारियों के अनुसार पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच पूरी होने तक और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
