महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिक्षाविद, समाजसेवी, उद्योगपति और पूर्व राज्यपाल पद्मश्री डॉ. डी. वाई. पाटिल का मंगलवार (4 अगस्त) को कोल्हापुर में निधन हो गया। उनके निधन से शिक्षा, राजनीति, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। देशभर के नेताओं, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को कोल्हापुर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा पार्थिव शरीर
जानकारी के अनुसार, डॉ. डी.वाई. पाटिल के पार्थिव शरीर को बुधवार सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। मंगलवार शाम महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे सहित कई राजनीतिक, सामाजिक और फिल्म जगत की हस्तियां उनके निवास पर पहुंचीं और श्रद्धांजलि अर्पित की।
एकनाथ शिंदे ने जताया गहरा शोक
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. डी.वाई. पाटिल के निधन से महाराष्ट्र ने एक दूरदर्शी नेता, महान शिक्षाविद और समाज के प्रति समर्पित मार्गदर्शक को खो दिया है।उन्होंने कहा कि डॉ. पाटिल ने केवल शिक्षण संस्थानों की स्थापना ही नहीं की, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और उत्कृष्टता को नई पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में डी.वाई. पाटिल विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ और आर्किटेक्चर सहित 16 से अधिक विषयों में 146 से ज्यादा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
‘लाखों युवाओं का भविष्य संवारा’ – सुप्रिया सुले
एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. डी.वाई. पाटिल ने स्कूलों, मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थानों का विशाल नेटवर्क स्थापित कर लाखों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर प्रदान किया।उन्होंने कहा कि शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। इस दुख की घड़ी में उन्होंने पाटिल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं भी व्यक्त कीं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में अमिट योगदान
डॉ. डी.वाई. पाटिल ने देश में सात स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित करने का गौरव हासिल किया। कोल्हापुर, पुणे और नवी मुंबई में उनके द्वारा स्थापित अस्पतालों ने लाखों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं।इसके अलावा नवी मुंबई स्थित डी.वाई. पाटिल स्टेडियम देश के आधुनिक स्टेडियमों में शामिल है, जिसने भारतीय खेलों, विशेषकर क्रिकेट और फुटबॉल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राज्यपाल के रूप में भी निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
शिक्षा और समाज सेवा के साथ-साथ डॉ. डी.वाई. पाटिल ने प्रशासनिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। वह बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। उनके कार्यकाल को गरिमापूर्ण, निष्पक्ष और जनहितकारी माना जाता है।
देशभर में शोक की लहर
डॉ. डी.वाई. पाटिल के निधन से शिक्षा जगत ने एक ऐसे दूरदर्शी व्यक्तित्व को खो दिया है, जिन्होंने अपने जीवन को शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके द्वारा स्थापित संस्थान आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान और अवसर प्रदान करते रहेंगे।
