दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। शुरुआती दौर में बढ़त बनाने वाले भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी मतगणना आगे बढ़ने के साथ पिछड़ गए और कांग्रेस ने सीट पर कब्जा जमा लिया।हालांकि इस उपचुनाव के नतीजे से राज्य सरकार के बहुमत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन इसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस हार से भाजपा के लिए आगामी चुनावों को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जबकि कांग्रेस के लिए यह परिणाम मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
कांग्रेस की अंदरूनी कलह भी रही चर्चा में
उपचुनाव के दौरान कांग्रेस के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आई। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की पार्टी सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह पर भाजपा से मिलीभगत के आरोप लगाए थे। साथ ही उन्होंने वर्ष 2028 विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की बात भी कही थी।
2028 विधानसभा चुनाव से पहले अहम संकेत
मध्य प्रदेश में वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। चुनाव के बाद पार्टी ने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया। ऐसे में दतिया उपचुनाव का परिणाम 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के लिए राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
क्यों कराना पड़ा दतिया विधानसभा उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट पर वर्ष 2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी और उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था। बाद में एक पुराने मामले में सजा होने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई, जिसके चलते इस सीट पर उपचुनाव कराया गया।राजेंद्र भारती चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए थे, जबकि भाजपा ने भी इस बार नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया। इसके बाद भाजपा ने युवा नेता आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा, जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया, जिन्होंने पार्टी को जीत दिलाई।
