सरायकेला: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के मार्गदर्शन में आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत तथा 18 जुलाई को आयोजित होने वाली परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) मामलों की विशेष लोक अदालत की तैयारियों को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।यह बैठक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष (प्रभार), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ब्रज किशोर पाण्डेय की अध्यक्षता में उनके न्यायालय कक्ष में संपन्न हुई।
पूर्व सुलह बैठकों की प्रगति की हुई समीक्षा
बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत एवं विशेष लोक अदालत के लिए चल रही पूर्व सुलह बैठकों की समीक्षा की गई। साथ ही दोनों लोक अदालतों के सफल आयोजन के लिए आवश्यक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए पूर्व सुलह बैठकें 12 जुलाई से प्रारंभ हो चुकी हैं, जबकि एनआई एक्ट से संबंधित विशेष लोक अदालत के लिए पूर्व सुलह बैठकें 3 जुलाई से संचालित की जा रही हैं।
न्यायिक पदाधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
बैठक को संबोधित करते हुए ब्रज किशोर पाण्डेय ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को राष्ट्रीय लोक अदालत एवं विशेष लोक अदालत के उद्देश्य और एजेंडा से अवगत कराया। उन्होंने अधिक से अधिक मामलों के सौहार्दपूर्ण निस्तारण के लिए पक्षकारों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने तथा प्रभावी प्रयास करने का निर्देश दिया।उन्होंने कहा कि न्यायिक पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, पूर्व सुलह बैठकों की प्रभावी कार्यप्रणाली और पक्षकारों के सहयोग से दोनों लोक अदालतों को ऐतिहासिक सफलता दिलाई जा सकती है।
कई न्यायिक अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में निम्नलिखित न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे—
प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय वीरेश कुमार
जिला एवं सत्र न्यायाधीश-द्वितीय दीपक मलिक
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लूसी सोसेन टिग्गा
सिविल जज (वरीय प्रभाग)-तृतीय अनामिका किस्कू
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव तौसीफ मेराज
अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी आशीष अग्रवाल
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी धृति धैर्य
अधिकाधिक मामलों के समझौता आधारित निस्तारण पर जोर
बैठक के अंत में सभी न्यायिक पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत एवं एनआई एक्ट विशेष लोक अदालत को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण आपसी समझौते के माध्यम से किया जा सके।
