Jharkhand: सऊदी अरब में गिरिडीह के प्रवासी मजदूर की मौत, 9 दिन बाद भी नहीं पहुंचा शव

गिरिडीह: रोजगार की तलाश में सात समंदर पार गए झारखंड के एक और लाल की सुदूर सऊदी अरब में मौत हो गई। गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत मुंडरो गांव का एक पीड़ित परिवार पिछले नौ दिनों से अपने प्रियजन के पार्थिव शरीर (शव) के वतन लौटने का बेसब्री और नम आंखों से इंतजार कर रहा है। 20 जून 2026 को सऊदी अरब में काम के दौरान प्रवासी मजदूर द्वारिका महतो की असमय मृत्यु हो गई थी। घटना के नौ दिन बीत जाने के बाद भी अब तक न तो शव भारत आ सका है और न ही विदेशी कंपनी की ओर से मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति साफ की गई है, जिससे पूरा परिवार गहरे सदमे और आर्थिक चिंता में डूबा है।

25 साल से ससुराल में रह रहे थे, जनवरी 2025 में गए थे सऊदी

मृतक द्वारिका महतो मूल रूप से गिरिडीह के ही डुमरी थाना क्षेत्र अंतर्गत चीनो समदा गांव के निवासी दशरथ महतो के पुत्र थे। हालांकि, पिछले लगभग 25 वर्षों से वे बगोदर के मुंडरो गांव में अपने ससुराल में घरजमाई के रूप में रह रहे थे। घर की माली हालत बेहद खस्ता होने और स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण, द्वारिका महतो जनवरी 2025 में अपने परिवार को खुशहाल भविष्य देने का सपना लेकर सऊदी अरब गए थे।
वहां वे प्रसिद्ध ‘केईसी कंपनी’ में एक प्रवासी श्रमिक के रूप में काम कर रहे थे। वे अपने पीछे पत्नी धनेश्वरी देवी, तीन बेटों—सचिन कुमार, सतीश कुमार, नीतीश कुमार और बुजुर्ग ससुर लालधारी महतो समेत पूरा रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं।

“न लाश आई, न कोई जवाब मिला” — रो-रोकर बुरा हुआ पत्नी का हाल

मृतक की पत्नी धनेश्वरी देवी ने रोते हुए बताया कि जैसे ही 20 जून को पति की मौत की खबर फोन पर मिली, पूरे घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।धनेश्वरी देवी ने प्रशासनिक उदासीनता पर दर्द बयां करते हुए कहा “नौ दिन हो गए हैं, लेकिन हमें यह भी नहीं पता कि मेरे पति का शव कब तक भारत आएगा। कंपनी के अधिकारी फोन पर कोई सीधा और संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। न तो शव भेजने की तारीख बताई जा रही है और न ही वहां के कानूनी मुआवजे (डेथ क्लेम) के बारे में कुछ साफ किया जा रहा है। हमारा पूरा भविष्य अंधेरे में चला गया है।”

प्रवासी हितैषी सिकंदर अली ने संभाला मोर्चा, कंपनी से की बात

झारखंड के प्रवासी श्रमिकों के हक और विदेशों में फंसे शवों को वतन लाने के लिए लगातार निस्वार्थ संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने इस मामले में संज्ञान लिया है। सिकंदर अली लगातार सऊदी अरब की संबंधित ‘केईसी कंपनी’ के अधिकारियों और वहां के भारतीय दूतावास के संपर्क में बने हुए हैं।सिकंदर अली ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कंपनी प्रबंधन के समक्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम कानूनों के तहत पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और कागजी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर शव को विमान से भारत भेजने की पुरजोर मांग की है, ताकि परिवार अपनी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर सके।

केंद्र और राज्य सरकार से न्याय की गुहार

द्वारिका महतो की असामयिक मृत्यु के बाद मुंडरो गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। मृतक की लाचार पत्नी और ग्रामीणों ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और झारखंड के मुख्यमंत्री से इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की भावुक अपील की है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि राजनयिक स्तर पर वार्ता कर शव को अविलंब गिरिडीह मंगाया जाए और गरीब आश्रितों को सरकारी सहायता व न्याय दिलाया जाए।

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