जोधपुर : आसाराम बापू को नाबालिग से दुष्कर्म मामले में राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए उसे तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया है।हालांकि अदालत ने गैंगरेप से जुड़े आरोपों में उसे राहत दी है।
सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद बरी
हाई कोर्ट ने मामले में सह-आरोपी शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता और शरतचंद को दोषमुक्त कर दिया।यह फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने सुनाया। अदालत ने 20 अप्रैल 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
2013 का है चर्चित मामला
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि जोधपुर स्थित आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया गया।इस मामले ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं।
2018 में पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
पॉक्सो कोर्ट जोधपुर ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।सह-आरोपियों शिल्पी और शरतचंद को भी 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई थी।बाद में तीनों आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
बचाव पक्ष ने गैंगरेप और मानव तस्करी के आरोपों को बताया गलत
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले में गैंगरेप और मानव तस्करी जैसे आरोप साबित नहीं होते हैं और कई साक्ष्य अभियोजन के दावों का समर्थन नहीं करते।वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि पीड़िता के बयान और अन्य सबूत आरोपी के खिलाफ पर्याप्त हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
फैसले के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।गौरतलब है कि आसाराम वर्ष 2013 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद था। बाद में उसे स्वास्थ्य आधार पर सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी, जिसे राजस्थान हाई कोर्ट ने समय-समय पर बढ़ाया था।
अब सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है बचाव पक्ष
करीब एक दशक पुराने इस चर्चित मामले में हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सभी की नजरें संभावित सुप्रीम कोर्ट अपील पर टिकी हुई हैं।
