प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे के भीतर दो बार देशवासियों से तेल और ईंधन बचाने की अपील की है। पहले उन्होंने हैदराबाद में लोगों से ऊर्जा संरक्षण की बात कही, इसके बाद गुजरात दौरे के दौरान वडोदरा में सरदार धाम हॉस्टल के उद्घाटन कार्यक्रम में भी ईंधन बचाने का संदेश दिया।प्रधानमंत्री की लगातार अपील के बाद सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या देश में फिर से लॉकडाउन जैसे हालात बनने वाले हैं। हालांकि सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है और देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
देश में पर्याप्त तेल और गैस का भंडार
सरकार के मुताबिक भारत के पास लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है। इसके अलावा करीब 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक भी उपलब्ध है। सरकार ने कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की गई है।
विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर से अधिक बताया गया है। यह भंडार लगभग 10 से 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक आर्थिक संकट या सप्लाई चेन में बाधा जैसी परिस्थितियों में देश के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
दुनिया का बड़ा ऑयल रिफाइनिंग हब है भारत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनर और चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक देश है। देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता लगभग 250 से 255 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जिसे सरकार 2030 तक बढ़ाकर 450 MMTPA करने की योजना पर काम कर रही है।हालांकि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और रणनीतिक भंडारण के कारण देश फिलहाल सुरक्षित स्थिति में माना जा रहा है।
सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने साफ किया है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। ईंधन बचाने की अपील ऊर्जा संरक्षण, आर्थिक बचत और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। इसे किसी संभावित लॉकडाउन या आपातकालीन स्थिति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
