नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आज ‘मंत्रियों के समूह’ की पांचवीं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध के कारण बाधित हो सकने वाली सप्लाई चेन और घरेलू बाजार पर पड़ने वाले इसके संभावित जोखिमों का आकलन करना था।
आपूर्ति श्रृंखला पर पैनी नजर
बैठक में वैश्विक आर्थिक रुकावटों के बावजूद देश के भीतर ईंधन (पेट्रोल-डीजल), खाद्य तेल और अन्य जरूरी सामानों की उपलब्धता की समीक्षा की गई। सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव या सप्लाई रूट में बाधा आने पर भी आम जनता को कोई परेशानी न हो।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आश्वासन
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक में सक्रिय रूप से भाग लिया और देशवासियों को सरकार की तैयारियों के प्रति आश्वस्त किया। राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सभी आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे शांत रहें और घबराहट से बचें। सरकार किसी भी प्रकार की कमी या रुकावट को रोकने के लिए ठोस रणनीति पर काम कर रही है।
आत्मनिर्भरता और सामूहिक भागीदारी का आह्वान
रक्षा मंत्री ने मुश्किल वैश्विक दौर में प्रधानमंत्री मोदी के उस संदेश को भी दोहराया, जो उन्होंने हाल ही में हैदराबाद में दिया था। देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।पीएम मोदी का संदेश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने और ऊर्जा संसाधनों (जैसे पेट्रोल-डीजल) का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने पर केंद्रित है, ताकि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहे।
