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Jharkhand: रांची में निजी स्कूलों पर सख्ती; फीस, किताब और यूनिफॉर्म को लेकर नए नियम लागू

रांची: मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में सोमवार को जिला प्रशासन और जिले के सभी निजी विद्यालयों (सीबीएसई , आईसीएसई , जैक ) के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने स्कूलों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने के बजाय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

तीन दिनों में पीटीएम का गठन अनिवार्य

उपायुक्त ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 3 दिनों के भीतर अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन करें। अब तक जिले के 272 में से केवल 13 स्कूलों ने इसकी सूचना दी है, जिसे लेकर डीसी ने कड़ा असंतोष व्यक्त किया।अनुपस्थित स्कूलों पर कार्रवाई: बैठक से नदारद रहने वाले 80 स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

फीस और नामांकन पर बड़ी राहत

अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित नियम तय किए हैं। स्कूल स्तर की समिति अधिकतम 10% तक ही फीस बढ़ा पाएगी। इससे ज्यादा वृद्धि के लिए जिला स्तरीय समिति की मंजूरी लेनी होगी। किसी भी विद्यालय द्वारा पुनर्नामांकन के नाम पर शुल्क लेना अब पूरी तरह प्रतिबंधित है।

परीक्षा से वंचित नहीं कर सकते

फीस बकाया होने की स्थिति में भी किसी छात्र को वार्षिक परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। ऐसा करना शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन होगा।

यूनिफॉर्म और किताबों की ‘मोनोपॉली’ खत्म

अभिभावकों को राहत देते हुए प्रशासन ने स्कूलों के व्यावसायिक हस्तक्षेप को सीमित कर दिया है। अब स्कूल परिसर के भीतर किताब या यूनिफॉर्म की बिक्री नहीं होगी। अभिभावक अपनी पसंद की किसी भी दुकान से इन्हें खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।सीबीएसई स्कूलों को केवल एनसीईआरटी की किताबें ही लागू करने को कहा गया है।स्कूल अब हर साल ड्रेस नहीं बदल पाएंगे। यूनिफॉर्म में बदलाव कम से कम 5 वर्षों के अंतराल पर ही संभव होगा।

उल्लंघन पर भारी जुर्माना और मान्यता रद्द

नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के लिए प्रशासन ने दंडात्मक प्रावधानों की घोषणा की है। नियमों के उल्लंघन पर 50 हजार से 2.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।गंभीर मामलों में स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अभिभावक अपनी शिकायतें ‘अबुआ साथी’ पोर्टल या जिला स्तरीय कोषांग के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं, जिसका जवाब स्कूलों को समय सीमा के भीतर देना होगा।
उपायुक्त की इस पहल से रांची के हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पारदर्शिता और छात्र हित ही प्राथमिकता होगी।

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