Madhya Pradesh: महेश्वर नगर परिषद ने निरस्त किया पुराना जन्म प्रमाण पत्र, मोनालिसा नाबालिग घोषित

खरगोन/महेश्वर: महाकुंभ के दौरान चर्चा में आई ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा के मामले में प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। खरगोन जिले की महेश्वर नगर परिषद ने आधिकारिक तौर पर किशोरी का पूर्व में जारी जन्म प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। नए दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर अब यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है, जिसके बाद पुलिस ने उसके अपहरण की जांच और तलाश तेज कर दी है।

जन्म प्रमाण पत्र में बड़ा फेरबदल और कार्रवाई

महेश्वर नगर परिषद के प्रभारी सीएमओ प्रियंक पंड्या ने इस प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि की है। 5 जून 2025 को जारी प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी, जिसे अब असत्य पाया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, किशोरी का वास्तविक जन्म 30 दिसंबर 2009 को अस्पताल में हुआ था। अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर नया प्रमाण पत्र जारी किया गया है और पुराने को रद्द कर दिया गया है।इसी बीच, शुक्रवार देर रात प्रभारी सीएमओ प्रियंक पंड्या का तबादला धार जिले के धामनोद में कर दिया गया है।

केरल हाईकोर्ट का आदेश: फरमान की गिरफ्तारी पर रोक

मामले के मुख्य आरोपी फरमान खान को कानूनी मोर्चे पर अस्थायी राहत मिली है।फरमान और किशोरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने 20 मई (अगली सुनवाई) तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। मध्य प्रदेश पुलिस को इस संबंध में नोटिस प्राप्त हुआ है और विभाग अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए जवाब तैयार कर रहा है।

राजनीतिक और संवैधानिक आयोगों की सक्रियता

इस संवेदनशील मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों और राष्ट्रीय आयोगों में भी तीखी प्रतिक्रिया है। खरगोन सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि फरमान खान ने षड्यंत्र के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर आदिवासी किशोरी से विवाह किया है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने एमपी डीजीपी और जिला प्रशासन को मामले में कड़ी धाराएं जोड़कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।महेश्वर विधायक राजकुमार मेव ने भी प्रेस वार्ता कर लड़की को जल्द वापस लाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

पुलिस की तलाश जारी

खरगोन एसपी रवींद्र वर्मा ने बताया कि किशोरी को बरामद करने के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और जनजाति आयोग को अब तक की प्रगति रिपोर्ट भेजी जा रही है।

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