
उज्जैन : उज्जैन जिले के बड़नगर अंतर्गत झलारिया गांव से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। गुरुवार शाम से 200 फीट गहरे बोरवेल में फंसे 3 साल के मासूम भगीरथ को 22 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर तो निकाल लिया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। NDRF और SDRF की टीमों ने शुक्रवार दोपहर बाद बच्चे के शव को बोरवेल से बाहर निकाला।
22 घंटे का संघर्ष और रेस्क्यू ऑपरेशन
गुरुवार शाम से शुरू हुआ यह रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतियों से भरा रहा।शुरुआती दौर में रेस्क्यू टीम ने रोप रिंग (रस्सी के छल्ले) के जरिए बच्चे को निकालने की कोशिश की, जो दो बार नाकाम रही इसके बाद लोहे की छड़, रस्सी और बोरवेल मोटर निकालने वाली मशीन का सहारा लिया गया।शुक्रवार को प्रशासन ने 5 पोकलेन मशीनों की मदद से बोरवेल के समानांतर एक टनल (सुरंग) खोदने का काम शुरू किया और बच्चे को 40 फीट की गहराई पर स्टेबल किया गया। अंततः NDRF ने अपने विशेष उपकरणों की मदद से मासूम को बाहर निकाला।
सीएम मोहन यादव ने जताया दुख; मुआवजे की घोषणा
इस हृदयविदारक घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा”उज्जैन के झलारिया गांव में बोरवेल में गिरे भगीरथ के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। दुर्भाग्यवश बालक को नहीं बचाया जा सका। सरकार की ओर से परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है।”
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
पुलिस प्रशासन (एसपी प्रदीप शर्मा) के अनुसार, यह घटना जिज्ञासा और लापरवाही का मिला-जुला परिणाम थी। बच्चे के पिता भेड़ चराने का काम करते हैं। गुरुवार शाम जब परिवार भेड़ चरा रहा था, तभी एक भेड़ के पैर से बोरवेल पर रखा पत्थर खिसक गया।पीछे से आ रहे मासूम भगीरथ ने जिज्ञासावश खुले बोरवेल में झांका और संतुलन बिगड़ने के कारण वह सीधे अंदर गिर गया।
लापरवाही बरतने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा पूरे समय मौके पर मौजूद रहे। एसपी ने बताया कि बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए बड़नगर के शासकीय अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जा रही है। जिस किसी की भी लापरवाही—चाहे वह बोरवेल खुला छोड़ने वाले की हो या कोई और—सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



