Jharkhand: ‘उत्कल दिवस’ पर ओड़िया संस्कृति की अनुपम छटा, उत्कल एसोसिएशन के महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब

जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में बुधवार को उत्कल दिवस के अवसर पर ओड़िया समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कला का अद्भुत नजारा देखने को मिला। साकची स्थित उत्कल एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित भव्य ‘ओड़िया महोत्सव’ ने पूरे शहर को ओडिशा के पारंपरिक रंगों में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ओड़िया भाषी समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और अपनी जड़ों से जुड़े इस उत्सव को उत्साह के साथ मनाया।

ओडिशा की जीवंत लोक कला और संगीत

महोत्सव के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध ओडिसी नृत्य के साथ-साथ संबलपुरी और डालखाई जैसे लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी गई। कलाकारों की थिरकन और वेशभूषा ने ओडिशा की मिट्टी की खुशबू बिखेर दी।ओड़िया लोक गीतों और भजनों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना दिया। कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से ओडिशा के गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया।

ओड़िया खान-पान और हस्तशिल्प का आकर्षण

महोत्सव परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉल्स लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।’छेना पोड़ा’, ‘दही वड़ा-आलू दम’ और अन्य पारंपरिक ओड़िया व्यंजनों का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। ओडिशा की प्रसिद्ध पट्टचित्र कला, संबलपुरी साड़ियाँ और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिसे जमशेदपुर के कला प्रेमियों ने काफी सराहा।

नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का प्रयास

उत्कल एसोसिएशन के आयोजकों ने बताया कि इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य शहर में रह रही नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति, भाषा और परंपराओं से परिचित कराना है।यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है, जहाँ समाज के हर वर्ग ने मिलकर सहभागिता की।वक्ताओं ने कहा कि जमशेदपुर जैसे बहुभाषी शहर में अपनी भाषाई पहचान को संजोकर रखना गौरव की बात है।देर शाम तक चले इस कार्यक्रम में पूरा उत्कल एसोसिएशन परिसर ‘वंदे उत्कल जननी’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

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