Bihar: मिड-डे मील खाते ही 15 बच्चों की बिगड़ी तबीयत, एनजीओ के खाने पर उठे सवाल

भागलपुर : भागलपुर जिले के हबीबपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शाहजंगी गंगोटा मैदान स्थित प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को मिड-डे मील के कारण बड़ा हादसा हो गया। स्कूल में परोसा गया खाना खाने के बाद करीब 15 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। आनन-फानन में एंबुलेंस के जरिए सभी पीड़ित बच्चों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

“खट्टा था छोले का स्वाद”: बच्चों की जुबानी

अस्पताल में भर्ती बच्चों ने बताया कि आज स्कूल में छोले-चावल दिया गया था। बच्चों के अनुसार छोले का स्वाद काफी खट्टा और संदेहास्पद था। तेज भूख लगने के कारण बच्चों ने वही खाना खा लिया। खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को पेट दर्द, लगातार उल्टी और चक्कर आने की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते बच्चों की हालत बिगड़ने लगी और स्कूल परिसर में चीख-पुकार मच गई।

स्कूल प्रशासन की संवेदनहीनता: अस्पताल में अकेले तड़पते रहे बच्चे

इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाला पहलू स्कूल प्रबंधन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया रहा।जब बच्चों को अस्पताल लाया गया, तो वहां न तो स्कूल के शिक्षक मौजूद थे और न ही प्रधानाचार्य। सूचना मिलने पर जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तो अपने बच्चों को अकेला देख उनका गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों का कहना है कि संकट की घड़ी में बच्चों को अकेला छोड़ना स्कूल प्रशासन की बड़ी लापरवाही है।हबीबपुर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

एनजीओ के माध्यम से वितरण की पहली ही दिन खुली पोल

जानकारी के अनुसार, भागलपुर के स्कूलों में आज से ही एक एनजीओ के माध्यम से मिड-डे मील वितरण की शुरुआत की गई थी।हालांकि यही खाना अन्य स्कूलों में भी भेजा गया था, लेकिन वहां से ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि क्या इसी स्कूल में खराब खाना पहुंचा था या स्टोर करने में लापरवाही हुई।सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, सभी बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है और उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। यह फूड पॉइजनिंग का मामला प्रतीत होता है।

दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि खाने के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। लापरवाही बरतने वाले एनजीओ और ड्यूटी से नदारद रहने वाले स्कूल स्टाफ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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