रांची: झारखंड पुलिस अब तकनीक और डेटा के सहारे अपराधियों पर नकेल कसेगी। पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य की कानून-व्यवस्था को ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के सांचे में ढालने की रूपरेखा तैयार की गई। गृह सचिव वंदना दाडेल और पुलिस महानिदेशक तदशा मिश्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में महिला सुरक्षा, साइबर क्राइम और नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर विशेष चर्चा की गई।
गिरफ्तारी आधारित नहीं, ‘दोषसिद्धि-उन्मुख’ होगी पुलिसिंग
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि पुलिस का मुख्य फोकस केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि दोषसिद्धि-उन्मुख अनुसंधान पर होना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपराधी सजा से बच न सकें। इसके लिए नए आपराधिक कानून (भारतीय न्याय संहिता) का शत-प्रतिशत पालन थाना स्तर तक सुनिश्चित करने को कहा गया है।
AI और तकनीक से लैस होगा जांच का तरीका
तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग को अनिवार्य करते हुए डीजीपी ने जांच और खुफिया संकलन के लिए आधुनिक टूल्स के इस्तेमाल का निर्देश दिया।अनुसंधान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग। NATGRID, NAFIS, CCTNS और ई-कोर्ट का प्रभावी एकीकरण।साक्ष्यों के संकलन में पारदर्शिता के लिए ऐप का पूर्ण अनुपालन।सभी अनुसंधानकर्ताओं को I-GOT पोर्टल पर अनिवार्य प्रशिक्षण।
नक्सलवाद और मादक पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
बैठक में राज्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर चर्चा हुई जिसमे नक्सल प्रभावित जिलों में युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। साथ ही उग्रवादियों की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति की समीक्षा की गई। अफीम की अवैध खेती के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाने और मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए। सोशल मीडिया के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
महिला और पर्यटक सुरक्षा सर्वोपरि
राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। POCSO एक्ट और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अलावा, झारखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘पर्यटक सुरक्षा’ को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
