Uttar Pradesh: शंकराचार्य को प्रशासन ने दिया नोटिस, तो डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले- ‘विवाद का करें समापन’

प्रयागराज: माघ मेला-2026 में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर संगम स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच गतिरोध गहरा गया है। पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए जाने की अनुमति न मिलने और नोटिस जारी होने के बाद अब सरकार की ओर से सुलह की कोशिशें शुरू हो गई हैं।

क्या है पूरा विवाद?

मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी पालकी पर सवार होकर संगम तक जाने की इच्छा जताई थी। हालांकि, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए प्रशासन ने पालकी ले जाने पर कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तें लगाई थीं। पालकी पर अड़े शंकराचार्य को मेला प्रशासन ने नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है। प्रशासन का तर्क है कि इससे मेला क्षेत्र की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।शंकराचार्य खेमे का मानना है कि यह उनकी पदवी की परंपरा और मर्यादा का विषय है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का ‘प्रणाम’ और ‘प्रार्थना’

इस संवेदनशील मुद्दे पर जब प्रयागराज पहुंचे उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले और सम्मानजनक शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने प्रशासन और धर्मगुरु के बीच की इस ‘खींचतान’ को खत्म करने का संकेत देते हुए कहा पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में मेरा सादर प्रणाम है। वह बढ़िया स्नान करें, उनसे मेरी यही प्रार्थना है। साथ ही मेरा उनसे विनम्र आग्रह है कि इस पूरे विषय (विवाद) का अब समापन करें।डिप्टी सीएम के इस बयान को विवाद को शांत करने की दिशा में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार इस मामले को और तूल नहीं देना चाहती और चाहती है कि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हो।

नोटिस से बढ़ा तनाव

प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में कथित तौर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की बात कही गई है। नोटिस मिलने के बाद संतों और भक्तों में रोष देखा गया। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डिप्टी सीएम के सार्वजनिक आग्रह के बाद शंकराचार्य का क्या रुख रहता है और क्या प्रशासन अपने कड़े रुख में नरमी बरतता है।

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