Uttar Pradesh: ‘सरकारी मान्यता न होना मदरसा बंद करने का आधार नहीं’, श्रावस्ती मामले में हाईकोर्ट के फैसले का किया स्वागत

लखनऊ : बसपा प्रमुख मायावती ने श्रावस्ती जिले में प्रशासन द्वारा एक मदरसे को सील किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले को ‘अति-महत्वपूर्ण और सामयिक’ बताया है। उन्होंने इस मुद्दे पर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सरकार को नसीहत भी दी है।

“अधिकारियों की मनमानी का परिणाम”

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह फैसला कि ‘सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा बंद करने का आधार नहीं है’, स्वागत योग्य है। उन्होंने कोर्ट द्वारा श्रावस्ती के मदरसे की सील 24 घंटे में हटाने के निर्देश की सराहना की।मायावती ने कहा शायद कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह जिला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही परिणाम है कि ऐसी अप्रिय घटनाएं सामने आती हैं। सरकार को इस पर उचित संज्ञान लेना चाहिए।

संसद और विधानसभा सत्रों के घटते समय पर जताई चिंता

“साल में कम से कम 100 दिन चले सदन”मदरसा विवाद के अलावा, मायावती ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। लखनऊ में चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के संदर्भ में उन्होंने सदन की कार्यवाही के गिरते स्तर पर चिंता जताई।

जन उपयोगिता पर गहरा प्रभाव

बसपा प्रमुख ने कहा कि संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों का समय लगातार घट रहा है। जो समय मिलता भी है, वह भारी हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाता है। इससे इन संस्थाओं की जन उपयोगिता कम हो रही है, जो लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन

बता दें कि लखनऊ में 19 जनवरी से 21 जनवरी तक पीठासीन अधिकारियों का 86वां अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में विधानमंडलों की कार्यवाही के घटते समय पर चर्चा की जा रही है, जिसे मायावती ने सराहनीय और समय की मांग बताया है।

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