Jharkhand: परसुडीह मंडी में कर्मचारी ने 5 माह में ₹44 लाख का मालिक को लगाया चूना, ऑडिट में खुला राज

जमशेदपुर: परसुडीह थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कृषि उत्पाद बाजार समिति (मंडी) में एक तेल कारोबारी के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। कारोबारी संजय शर्मा की दुकान में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बड़ी चतुराई से पिछले पांच महीनों में करीब 44 लाख रुपये का गबन कर लिया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब दुकान की नियमित ऑडिट की गई।

भरोसे का फायदा उठाकर रची साजिश

जानकारी के मुताबिक, आरोपी की पहचान अर्पित ऋषि के रूप में हुई है, जो सुंदरनगर थाना क्षेत्र के ब्यांगबिल हाड़तोपा गांव का निवासी है। अर्पित पिछले पांच महीनों से संजय शर्मा की दुकान में कार्यरत था। मालिक का विश्वास जीतकर उसने दुकान के रजिस्टर और सामान की डिलिवरी का पूरा जिम्मा अपने हाथों में ले लिया था। इसी भरोसे की आड़ में उसने गबन का खेल शुरू किया।

‘फर्जी बिल और गलत डिलिवरी’ का खेल

जांच के दौरान धोखाधड़ी का जो तरीका सामने आया है, वह हैरान करने वाला है।अर्पित को जिस गंतव्य पर सामान पहुंचाने के लिए भेजा जाता था, वह वहां माल न उतारकर कहीं और डिलिवरी कर देता था। माल की हेराफेरी के बाद वह दुकान के रजिस्टर में फर्जी बिल बनाकर जमा कर देता था।चूंकि रजिस्टर मेंटेनेंस का काम भी वही देख रहा था, इसलिए उसने रिकॉर्ड्स में ऐसी कलाकारी की कि मालिक को लंबे समय तक संदेह नहीं हुआ।

5 माह में डकारे 44 लाख रुपये

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, अर्पित की नीयत 20 फरवरी 2025 से खराब हुई थी। उसने फरवरी से जुलाई 2025 के बीच मात्र पांच महीनों में ही 44 लाख रुपये का गबन कर लिया। गणित लगाया जाए तो वह हर महीने लगभग 9 लाख रुपये की हेराफेरी कर रहा था।

ऑडिट शुरू होते ही आरोपी फरार

संजय शर्मा ने जब अपनी दुकान के खातों की ऑडिट करानी शुरू की, तो हिसाब में भारी अंतर मिलने लगा। जैसे ही अर्पित को भनक लगी कि उसकी पोल खुलने वाली है, वह दुकान आना बंद कर फरार हो गया। इसके बाद पीड़ित कारोबारी ने परसुडीह थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई

परसुडीह थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गबन में मंडी के कुछ अन्य व्यापारी या बाहरी लोग तो शामिल नहीं थे, जो अवैध रूप से माल खरीद रहे थे।

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