श्योपुर: समाज को झकझोर देने वाले एक जघन्य सामूहिक बलात्कार मामले में श्योपुर के तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने अपना कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने दो दोषियों शोएब खान उर्फ नानका और मोहसीन खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।
क्या था मामला?
घटना 16 सितंबर 2024 की है। थाना कोतवाली क्षेत्र की एक 15 वर्षीय किशोरी दोपहर करीब 3 बजे घर से सामान लेने दुकान जा रही थी। रास्ते में आरोपी नानका उर्फ शोएब खान ने उसे झांसा देकर गली के अंदर बुलाया। जैसे ही पीड़िता वहां पहुँची, शोएब ने उसका हाथ पकड़कर जबरन उसे मकान के अंदर खींच लिया, जहाँ मोहसीन खान पहले से मौजूद था।आरोपियों ने दरिंदगी की हदें पार करते हुए पीड़िता के साथ मारपीट की।मोहसीन खान ने पीड़िता की गर्दन पर चाकू रखकर उसे जान से मारने की धमकी दी।इसके बाद आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया।शोर सुनकर जब स्थानीय दुकानदार और पीड़िता के परिजन मौके पर पहुँचे, तब उसे आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया जा सका।
न्यायालय की तल्ख टिप्पणी: “समाज को झकझोरने वाला अपराध”
15 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए माननीय न्यायालय ने इस कृत्य को समाज के लिए कलंक बताया। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय और असुरक्षा की भावना पैदा करता है। ऐसे कृत्य देश के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, इसलिए दोषियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
धाराएं और जुर्माना
न्यायालय ने आरोपी शोएब उर्फ नानका को धारा 70 (2) बीएनएस में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 127 (2) बीएनएस में 6 माह का कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना, धारा 351 (3) बीएनएस में 5 वर्ष का कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना और धारा 115 (2) बीएनएस में 6 माह का कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। वहीं आरोपी मोहसिन खान को भी धारा 70 (2) बीएनएस में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना, अन्य संबंधित धाराओं के तहत सजा के साथ-साथ धारा 25 (1-बी) (बी) आयुध अधिनियम के अंतर्गत भी दंडित किया गया।
पीड़िता को संबल: 10 लाख का मुआवजा
न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पीड़िता को 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान करने का आदेश दिया है। यह राशि दोषियों पर लगाए गए जुर्माने से अलग होगी, ताकि पीड़िता अपने जीवन को पुनर्गठित कर सके।
प्रभावी पैरवी का परिणाम
इस संवेदनशील मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रतिभा उमरैया और एडीपीओ रिचा शर्मा ने बेहद प्रभावी पैरवी की। उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को मजबूती से अदालत के समक्ष रखा, जिससे वारदात के महज 16 महीनों के भीतर दोषियों को अंजाम तक पहुँचाया जा सका।
