सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने न सिर्फ एक मासूम की जान ले ली, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी बेनकाब कर दिया। पुपरी थाना क्षेत्र के झझी-हट गांव के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे में सातवीं कक्षा के छात्र रितेश कुमार उर्फ गोलू की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक रितेश संतोष दास का पुत्र था।
कोचिंग के लिए निकला था, लौट नहीं सका
रितेश रोज की तरह सुबह घर से कोचिंग पढ़ने के लिए निकला था। परिवार को क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी की आखिरी सुबह साबित होगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सड़क पर तेज रफ्तार से आ रहे मछली लदे पिकअप वाहन ने रितेश को जोरदार टक्कर मार दी।टक्कर इतनी भयावह थी कि छात्र ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल
घटना की जानकारी मिलते ही रितेश के परिजन मौके पर पहुंचे। सड़क पर बेटे का निर्जीव शरीर देखकर माता-पिता बदहवास हो गए। मां का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं पिता बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोते नजर आए। गांव में मातम का माहौल फैल गया।
मछलियां लूटती रही भीड़, मानवता हुई शर्मसार
इस दर्दनाक हादसे के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया। एक तरफ सड़क किनारे एक मासूम का शव पड़ा था, परिवार गहरे सदमे में था, वहीं दूसरी ओर भीड़ पिकअप वाहन से गिरी मछलियों को लूटने में जुट गई।कोई बोरी में मछलियां भरता दिखा, तो कोई हाथों में मछलियां लेकर भागता नजर आया। हैरानी की बात यह रही कि किसी ने न तो एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की और न ही घायल बच्चे को बचाने का प्रयास किया। यह दृश्य समाज में गिरती संवेदनशीलता और इंसानियत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही पुपरी थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने भीड़ को हटाया, छात्र के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और हादसे में शामिल पिकअप वाहन को जब्त कर लिया।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। वाहन चालक की पहचान की जा रही है और दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि समाज के उस चेहरे को उजागर करती है, जहां मौत के सामने भी लालच इंसानियत पर भारी पड़ जाता है। एक नन्ही जान चली गई और लोग मदद करने के बजाय मछलियां लूटते रहे—यह दृश्य पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है।
