Bihar: बिहार में फिर दिखेगा ‘नीतीश-आरसीपी’ साथ? JDU में वापसी की अटकलें तेज

पटना : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कभी सबसे भरोसेमंद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जनता दल (यूनाइटेड) में वापसी की चर्चाएं अब आम हो गई हैं। सूत्रों की मानें तो आरसीपी सिंह ने खुद पार्टी में लौटने की इच्छा जताई है और जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी बातचीत के कई दौर संपन्न हो चुके हैं।

‘अभिभावक’ वाले बयान से बदली हवा

हाल ही में आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार को अपना ‘अभिभावक’ बताया था, जिसके बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया था। रविवार को पटना में कुर्मी समुदाय के एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह, दोनों ने हिस्सा लिया। हालांकि वहां दोनों की सीधी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन कार्यक्रम में समर्थकों द्वारा आरसीपी सिंह की वापसी के नारे लगाए गए, जिसने इन अटकलों को और हवा दे दी।

जन सुराज से मोहभंग और ‘घर वापसी’ की राह

साल 2024 में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का दामन थामने वाले आरसीपी सिंह अब अपने पुराने घर (जदयू) को ही अपना भविष्य मान रहे हैं।जदयू नेताओं का कहना है कि जन सुराज में गए कई ऐसे पुराने साथी, जिन्होंने नीतीश कुमार के साथ दो दशकों तक काम किया है, अब वापस आने की इच्छा जता रहे हैं।पार्टी के एक धड़े का मानना है कि आरसीपी सिंह के पास संगठन चलाने का लंबा अनुभव है और आने वाले चुनावों को देखते हुए उनकी वापसी पार्टी को मजबूती दे सकती है।

नीतीश कुमार के ‘हनुमान’ से ‘सियासी विदाई’ तक का सफर

आरसीपी सिंह का सफर नीतीश कुमार के साथ बेहद खास रहा है।1998 में जब नीतीश रेल मंत्री थे, तब से आरसीपी उनके साथ हैं।2005 से 2010 तक नीतीश कुमार के मुख्य सचिव के रूप में काम किया।2010 से 2022 तक राज्यसभा सांसद और मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री रहे।तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के साथ मनमुटाव के बाद अगस्त 2022 में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

अब गेंद नीतीश कुमार के पाले में

जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “आरसीपी सिंह ने लगभग सभी शीर्ष नेताओं से बात कर ली है। पार्टी में भी उनके अनुभव की जरूरत महसूस की जा रही है। अब अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेना है कि वे अपने पुराने सिपहसालार को कब और किस भूमिका में वापस लाते हैं।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आरसीपी सिंह की वापसी होती है, तो यह कोल्हान से लेकर उत्तर बिहार तक कुर्मी वोटों को लामबंद करने में जदयू के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।

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