भिंड (मध्य प्रदेश): साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे अब श्मशान की ओर जा रहे लोगों को भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूक रहे। भिंड की मीरा कॉलोनी निवासी रिटायर्ड शिक्षक प्रेम सिंह कुशवाह के साथ हुई 29.50 लाख रुपये की ठगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम खौफनाक नहीं है।
अर्थी के पीछे चल रहे थे, तभी बिछाया जाल
प्रेम सिंह कुशवाह एक शव यात्रा में शामिल थे और अर्थी के पीछे-पीछे जा रहे थे। तभी उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताया। ठगों ने टीचर से कहा, “आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े केस में आया है। इस केस का मास्टरमाइंड संजय राउत है और उसने जिन 47 लोगों के नाम लिए हैं, उनमें आखिरी नाम आपका है।”
“श्मशान नहीं, घर जाओ और कमरा बंद करो”
जब टीचर ने कहा कि वे कभी मुंबई गए ही नहीं और अभी श्मशान जा रहे हैं, तो ठगों ने उन्हें डराते हुए कहा कि वहां बहुत शोर है, तुरंत घर पहुंचें और कमरे में खुद को बंद कर लें। गिरफ्तारी का डर इतना गहरा था कि टीचर बीच रास्ते से घर लौट आए। यहीं से शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल।
. रामचरितमानस की कसम और मर्डर का खौफ
ठगों ने शिक्षक को पूरी तरह मानसिक रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया। ठग ने टीचर से उनके इष्ट देव के बारे में पूछा और फिर ‘रामचरितमानस’ पर हाथ रखकर कसम खिलवाई कि वे इस ‘गोपनीय जांच’ के बारे में अपनी पत्नी या बच्चों तक को कुछ नहीं बताएंगे।ठगों ने एक फर्जी कहानी सुनाई कि बेंगलुरु की एक महिला डॉक्टर ने पुलिस को जानकारी दी थी, जिसे अपराधियों ने ट्रेन में ही मरवा दिया। उन्होंने टीचर को धमकी दी, अगर घर से बाहर निकले या किसी को बताया, तो तुम्हारा भी मर्डर हो जाएगा।
तीन दिन तक बंधक, फिर 29.50 लाख की चपत
लगातार तीन दिनों तक ऑनलाइन निगरानी (स्काइप और व्हाट्सएप कॉल) में रखने के बाद, तीसरे दिन ठगों ने कहा कि यदि उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करनी है, तो ‘कोर्ट’ के खाते में सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। डरे हुए शिक्षक चुपचाप बैंक पहुंचे और अपने जीवन भर की जमा पूंजी 29 लाख 50 हजार रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने वादा किया कि 48 घंटे में क्लियरेंस सर्टिफिकेट मिलते ही पैसे वापस आ जाएंगे, लेकिन पैसा मिलते ही उनके नंबर बंद हो गए।
गुजरात से जुड़ा है ठगी का तार
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि शिक्षक ने जिस खाते में पैसे भेजे, वह गुजरात के वडोदरा का है। चौंकाने वाली बात यह है कि उस खाते से पैसा तुरंत 20 अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
“रिटायर्ड शिक्षक की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है। साइबर सेल की मदद से खातों को ट्रैक किया जा रहा है।” – ब्रजेंद्र सेंगर, टीआई (सिटी कोतवाली)
साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह
कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।यदि कोई फोन पर डराए, तो तुरंत फोन काटें और परिजनों या 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर सूचना दें।व्हाट्सएप या स्काइप कॉल पर किसी को अपनी गोपनीय जानकारी न दें।
