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Bihar: विराट रामायण मंदिर में स्थापित होगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, बिहार में हुआ भव्य स्वागत

मोतिहारी।दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया गांव के जानकीनगर में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में की जाएगी। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से रवाना किया गया यह विराट शिवलिंग अपनी लंबी और ऐतिहासिक यात्रा तय करते हुए अब बिहार में प्रवेश कर चुका है।जानकारी के अनुसार, शिवलिंग को 21 नवंबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से विशेष वाहन द्वारा रवाना किया गया था। करीब 38 दिनों की यात्रा में यह शिवलिंग तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से होते हुए शनिवार को गोपालगंज जिले पहुंचा। जैसे ही शिवलिंग बिहार की धरती पर पहुंचा, श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला।गोपालगंज में शिवलिंग के आगमन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भव्य स्वागत किया। लोगों ने तिलक लगाकर आरती उतारी और फूल-अक्षत से विधिवत पूजा-अर्चना की। शिवलिंग के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बन गया।यात्रा के दौरान जहां-जहां शिवलिंग ले जाने वाला वाहन रुक रहा है, वहीं पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ स्वतः जुट जा रही है। नए साल के जनवरी महीने में शिवलिंग के मोतिहारी पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के हवाले से पीआरओ राजीव कुमार ने बताया कि मध्यप्रदेश के बाद शिवलिंग उत्तरप्रदेश से होते हुए बिहार में प्रवेश करेगा। बिहार में यह शिवलिंग आरा, सकड्डी, छपरा, मसरख, मोहम्मदपुर, कजरिया, केसरिया सहित करीब 10 से 15 स्थानों पर स्वागत समारोह के बाद अंततः विराट रामायण मंदिर पहुंचेगा।बताया गया कि इस विशाल शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में पिछले दस वर्षों से किया जा रहा था। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा है और ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है। सड़क मार्ग से इसके परिवहन के लिए 96 चक्कों वाले विशेष ट्रक का उपयोग किया गया है।शिवलिंग निर्माण से जुड़ी कंपनी के अनुसार, इस भव्य शिवलिंग के निर्माण पर करीब तीन करोड़ रुपये की लागत आई है। जनवरी में इसके विराट रामायण मंदिर पहुंचने के बाद विधिवत स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।विराट शिवलिंग का आगमन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से भी बिहार और पूर्वी चंपारण के लिए ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। इससे क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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