Uttar Pradesh: बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप कांड में 9 साल बाद न्याय, 5 दोषियों को आखिरी सांस तक उम्रकैद; कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

बुलंदशहर। देश को झकझोर कर रख देने वाले और राजनीति से लेकर न्यायपालिका तक में हलचल मचाने वाले नेशनल हाईवे-91 (अब NH-34) गैंगरेप मामले में सोमवार को कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) ओमप्रकाश वर्मा तृतीय की अदालत ने सभी पांचों जीवित अभियुक्तों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

वह खौफनाक रात: 29/30 जुलाई 2016

विशेष लोक अभियोजक वरुण कौशिक ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात 29/30 जुलाई 2016 की रात को हुई थी। नोएडा से एक परिवार कार में सवार होकर शाहजहांपुर जा रहा था। कोतवाली देहात क्षेत्र के दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास बदमाशों ने गाड़ी को रोक लिया और पूरे परिवार को बंधक बना लिया। परिजनों के सामने ही बदमाशों ने मां और नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप जैसी दरिंदगी की और लूटपाट कर फरार हो गए।

इन दोषियों को मिली सजा

शनिवार को दोषी करार दिए जाने के बाद, सोमवार 22 दिसंबर को कोर्ट ने जुबेर उर्फ सुनील उर्फ परवेज (कन्नौज),साजिद (कन्नौज),धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेन्द्र (फर्रुखाबाद),सुनील उर्फ सागर (फर्रुखाबाद),नरेश उर्फ संदीप उर्फ राहुल (फर्रुखाबाद) को सजा सुनाई।मामले के एक मुख्य अभियुक्त सलीम बावरिया की 15 दिसंबर 2019 को ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।

जब हिल गई थी शासन-प्रशासन

यह मामला इतना गंभीर था कि इसने तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद शासन ने तत्कालीन एसएसपी वैभव कृष्ण समेत 19 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। हाईकोर्ट द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद, शासन की संस्तुति पर इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी। सीबीआई ने गहन जांच के बाद 6 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

कोर्ट का कड़ा रुख

न्यायालय ने गवाहों के बयानों, सीबीआई द्वारा पेश किए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह माना कि यह कृत्य समाज के विरुद्ध एक जघन्य अपराध है। प्रत्येक अभियुक्त पर लगाए गए 1.81 लाख रुपये के जुर्माने की राशि में से एक बड़ा हिस्सा पीड़ितों को क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाएगा।

पीड़ित परिवार को मिला न्याय

9 साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को कानूनी न्याय मिला है। लोक अभियोजक ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने कड़ी पैरवी की ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और हाईवे पर सफर करने वाले परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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