मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने वाले चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) को सोमवार को एक तीखी सीख दी है। फडणवीस ने स्पष्ट कहा कि राजनीति में हमेशा विचारधारा से ज्यादा संख्या (नंबर) को महत्व दिया जाता है, और बिना संख्या के विचारधारा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
लोकतंत्र में नंबर का महत्व सबसे ऊपर
फडणवीस ने राजनीति के व्यावहारिक पहलुओं पर बात करते हुए पीके पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को चलाने के दो ही तरीके हैं—विचारधारा और नंबर। लेकिन “आप बिना नंबर के विचारधारा को आगे नहीं बढ़ा सकते।”उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने विचारधारा के बारे में खूब बात की, लेकिन एक भी सीट हासिल नहीं हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में व्यावहारिक होना होगा, और प्रासंगिक बने रहने के लिए जरूरी है कि आपके पास नंबर हों (यानी विधायकों, सांसदों या अन्य जनप्रतिनिधियों की संख्या)।गौरतलब है कि प्रशांत किशोर की पार्टी को चुनाव में इतने वोट भी नहीं मिले हैं कि वह राज्य की मान्यता प्राप्त पार्टी का दर्जा हासिल कर सके (इसके लिए न्यूनतम 6 फीसदी वोट जरूरी होते हैं)।
गठबंधन की राजनीति पर फडणवीस का अनुभव
गठबंधन सरकार चलाने के अपने व्यापक अनुभव का जिक्र करते हुए फडणवीस ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर भी बात की।उन्होंने कहा कि अब गठबंधन की राजनीति परिपक्व हो गई है और भाजपा इसमें आगे है। उन्होंने स्वीकार किया कि भले ही विचारधारा मेल नहीं खाती हो, लेकिन पार्टियां एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत काम कर सकती हैं। फडणवीस वर्तमान में महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। इससे पहले वह 2014 से 2019 तक पूरे 5 साल गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री रहे थे। उन्होंने 1990 के दशक का जिक्र किया जब देश को 6 अलग-अलग प्रधानमंत्री मिले थे, जो राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता था।मुंबई के आगामी निकाय चुनावों से पहले फडणवीस का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने गठबंधन की रणनीति और प्रशांत किशोर जैसे नए खिलाड़ियों के बारे में खुलकर बात की है।
