
अयोध्या/लखनऊ: बजरंग दल के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक, विनय कटियार अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संपूर्ण होने के बाद 25 नवंबर को आयोजित ध्वजारोहण समारोह में शामिल नहीं हुए। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सहित कई बड़े गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
निमंत्रण मिलने के बाद भी कार्यक्रम से रहे नदारद
रामजन्मभूमि ट्रस्ट से निमंत्रण मिलने के बावजूद कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई चर्चाओं के बीच, विनय कटियार ने किसी भी तरह की नाराजगी की वजह से इनकार किया है।उन्होंने कहा कि वो “फ्रीस्टाइल आदमी हैं” और उन्हें अपने इलाज के लिए कानपुर जाना था, इसलिए वो अयोध्या से निकल आए। 25 नवंबर को अपने लखनऊ आवास पर पत्रकार से बातचीत में कटियार ने कहा, “सब लोग तो वहां आ गए थे… हमको लखनऊ आना था और कानपुर में मुंह का इलाज करवाने भी जाना है, इसलिए वो अयोध्या से निकल आए।” निमंत्रण मिलने के बावजूद कार्यक्रम में न जाने पर उन्होंने कहा, “अरे कहां झंझट में पड़ें। मंदिर तो बन ही गया। केवल झंडा फहराना है। देश के प्रधानमंत्री आ गए। और भी प्रमुख लोग आए। केवल झंडा ही फहराना था।”
असंतोष की अटकलों को किया खारिज
जब पत्रकारों ने उनके मन की बात जानने और कथित नाराजगी की वजह कुरेदने की कोशिश की, तो कटियार ने सीधे तौर पर असंतोष की बात को खारिज कर दिया।कार्यक्रम में शामिल न होने के सवाल पर कटियार ने कहा, “इसकी कोई जरूरत नहीं थी। देश के प्रधानमंत्री आ गए। सब कुछ आ गए। सब तो आ गए वहां। फिर क्या दिक्कत है।” उन्होंने कार्यक्रम के दौरान हुई भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था का भी हवाला दिया: “चारों तरफ रोड जाम कर दिए गए थे। प्रधानमंत्री आए हैं। स्वाभाविक है, उनकी भी सुरक्षा का सवाल है।” कटियार ने जोर देकर कहा कि वह असंतुष्ट नहीं हैं, बल्कि उन्हें लखनऊ-कानपुर आना था। उन्होंने अंत में कहा, “हम कीस्टाइल आदमी हैं। मंदिर ही बनवाया है। उसमें सब लोग पहुंच गए और हम निकल आए थे।”विनय कटियार का यह बयान, राम मंदिर आंदोलन के पुराने योद्धाओं की वर्तमान भूमिका और महत्व पर उठ रहे सवालों के बीच आया है।



