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Jharkhand: आदित्य साहू बने झारखंड भाजपा के नए अध्यक्ष, जुएल उरांव ने की आधिकारिक घोषणा

रांची : झारखंड भाजपा को बुधवार को अपना नया सारथी मिल गया है। राज्यसभा सांसद और वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू को निर्विरोध रूप से झारखंड प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष चुना गया है। रांची स्थित प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय मंत्री और प्रदेश चुनाव अधिकारी जुएल उरांव ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा की। आदित्य साहू निवर्तमान अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का स्थान लेंगे, जो अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करेंगे।

निर्विरोध निर्वाचन और भारी समर्थन

पार्टी के ‘संगठन पर्व’ के अंतिम चरण में मंगलवार को नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई थी। इस पद के लिए केवल आदित्य साहू ने ही अपना पर्चा दाखिल किया था।उनके नाम का प्रस्ताव बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी जैसे दिग्गजों ने किया। किसी अन्य नामांकन के न होने से यह साफ हो गया कि आदित्य साहू के नाम पर पार्टी के सभी गुटों और शीर्ष नेतृत्व की पूर्ण सहमति है।

ओरमांझी के ‘कुचू’ गांव से प्रदेश कार्यालय तक का सफर

आदित्य साहू की राजनीतिक यात्रा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि भाजपा में एक साधारण कार्यकर्ता भी सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।1980 में ओरमांझी के कुचू गांव में एक साधारण बूथ कार्यकर्ता के रूप में राजनीति की शुरुआत की।एम.कॉम की पढ़ाई करने के बाद वे रामटहल चौधरी कॉलेज में व्याख्याता (प्रोफेसर) भी रहे।वे प्रदेश महामंत्री, उपाध्यक्ष और कोल्हान व पलामू प्रमंडल के प्रभारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।साल 2022 में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर सबको चौंका दिया था।

‘अजातशत्रु’ छवि का मिला लाभ

आदित्य साहू की सबसे बड़ी ताकत उनका सहज स्वभाव और गुटबाजी से दूर रहना माना जाता है। 46 वर्षों की लंबी राजनीतिक यात्रा में उन्होंने संयुक्त बिहार के दिग्गज नेता कैलाशपति मिश्र से लेकर कड़िया मुंडा, बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास तक सबके साथ काम किया, लेकिन कभी किसी खास खेमे का ठप्पा अपने ऊपर नहीं लगने दिया। इसी ‘सर्वमान्य’ छवि के कारण आज उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी मिली है।

मिशन 2029 और संगठनात्मक चुनौतियां

राज्य में हालिया विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा अब संगठन को नए सिरे से धार देने में जुटी है। ओबीसी (साहू/तेली) समाज से आने वाले आदित्य साहू की नियुक्ति को राज्य के जातीय समीकरणों को साधने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उनके कंधों पर अब झारखंड में पार्टी को फिर से सत्ता के करीब ले जाने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की भारी जिम्मेदारी होगी।

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