Jharkhand: यूसील नरवा पहाड़ में विस्थापितों का ‘हल्ला बोल’,कंपनी में कामकाज ठप

जादूगोड़ा :यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की नरवा पहाड़ इकाई में रोजगार की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन दूसरे दिन और भी अधिक मुखर हो गया है। ‘यूसील विस्थापित कमेटी’ के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने कंपनी के मुख्य गेट को पूरी तरह जाम कर दिया है, जिससे माइंस और कार्यालय के कार्यों पर व्यापक असर पड़ा है।
“आर-पार की लड़ाई” : कर्मियों के प्रवेश पर रोक
मंगलवार को आंदोलन की जानकारी देते हुए विस्थापित कमेटी के अध्यक्ष बुधराई किस्कु ने स्पष्ट किया कि विस्थापितों के धैर्य का बांध अब टूट चुका है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रबंधन हमारी जायज मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक गेट जाम रहेगा। गेट जाम होने के कारण कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया, जिससे कंपनी की उत्पादन प्रक्रिया पर असर पड़ा है।कमेटी ने प्रबंधन के समक्ष मांग रखी है कि विस्थापितों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी नौकरी दी जाए, क्योंकि उनकी जमीन पर ही यह संयंत्र खड़ा है।
प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कंपनी के लिए अपनी उपजाऊ भूमि देने के बावजूद विस्थापितों के बच्चे आज भी रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बुधराई किस्कु ने दो टूक शब्दों में कहा प्रबंधन विस्थापितों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करे। विस्थापितों को केवल एक बार नौकरी नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी रोजगार सुनिश्चित करना होगा, क्योंकि जमीन हमेशा के लिए कंपनी की हो गई है।
सुरक्षा बल मुस्तैद, तनाव बरकरार
लगातार दूसरे दिन गेट जाम रहने से कंपनी परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस स्थिति पर नजर रखे हुए है। हालांकि, आंदोलनकारी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार वार्ता हुई लेकिन प्रबंधन ने ठोस कदम नहीं उठाए, जिसके कारण अब उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की उम्मीद
इलाके के अन्य ग्रामीण संगठनों ने भी इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया है। अब सभी की निगाहें यूसील प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द ही सार्थक वार्ता नहीं हुई, तो आंदोलन के और भी उग्र होने की संभावना जताई जा रही है।



