Bihar:बिहार शराबबंदी पर फिर गरमाए जीतनराम मांझी, यूरिया वाली जानलेवा दारू पीकर गरीब मर रहे; महंगी पीने वाले सुरक्षित’

पटना। बिहार में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के सुप्रीमो जीतनराम मांझी के निशाने पर आ गया है। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए मांझी ने नीतीश सरकार के शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर न सिर्फ सवाल उठाए, बल्कि यह भी दावा किया कि माफिया यूरिया जैसे हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल कर जानलेवा शराब बना रहे हैं, जिसका शिकार सिर्फ गरीब हो रहे हैं।
दो घंटे में बन रही ‘नुकसानदायक’ शराब
जीतनराम मांझी ने शराब बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि शराब बनाने में लगभग 8 दिन का समय लगता है और उसमें इस्तेमाल होने वाले तत्व स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहते थे।उन्होंने कहा, “मगर आजकल जो चोरी-छिपे दो घंटे के अंदर दारू बनाई जा रही है, वो बहुत नुकसानदायक है।” उन्होंने दावा किया कि शराब माफिया और तस्कर यूरिया जैसे हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल करके यह शराब बना रहे हैं, जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो रही है।
‘गरीबों को जेल, माफिया खुलेआम’
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि शराबबंदी कानून को सही तरीके से लागू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रशासन थोड़ी-थोड़ी दारू पीने वाले गरीब लोगों को पकड़कर जेल में डाल रहा है, जबकि बड़े माफिया और तस्कर अधिकारियों की मिलीभगत से खुलेआम घूम रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन को जनता और सरकार से चिढ़ है। मांझी ने दावा किया कि शराबबंदी कानून के तहत लगभग 4 लाख मुकदमे ऐसे हैं जिनमें आम गरीब लोगों को आरोपी बनाया गया है।ये लोग तस्कर नहीं हैं, बस थकावट दूर करने या दवाई के रूप में थोड़ी पी लेते हैं।
महंगी शराब पीने वाले सुरक्षित
मांझी ने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर और अफसर जैसे सम्पन्न लोग हजारों रुपये खर्च कर महंगी शराब लेते हैं और रात में पीते हैं, जबकि माफिया द्वारा यूरिया मिलाकर दो घंटे में तैयार की गई जहरीली शराब पीकर गरीब मर रहे हैं।जीतनराम मांझी ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि शराबबंदी कानून एक अच्छा कानून है, लेकिन इसे ठीक से लागू नहीं किया गया है, जिसके कारण गरीबों को अपराधी बनाया जा रहा है और जहरीली शराब का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तत्काल सुधार की मांग की है।



