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SIMDEGA: कोलेबिरा – एक प्लंबर की मौत ने उठाए कई सवाल — भीड़ की हिंसा, अस्पताल की लापरवाही और सिस्टम की देरी पर परिजनों का आरोप

सिमडेगा :सिमडेगा जिले के कोलेबिरा में 19 नवंबर को हुई एक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पीएचईडी ऑफिस में काम करने वाले प्लंबर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिवार ने भीड़, पुलिस और स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

काम के बहाने बुलाया, विवाद हुआ… फिर हुआ हमला

परिजनों ने बताया कि ऐडेगा पंचायत की मुखिया जीरेन डांग ने मोटर फिटिंग का काम कराने के लिए प्लंबर को बुलाया था। काम के दौरान मामूली बहस हुई। इसके बाद वह रामजड़ी बाजार में खाना खाकर अपने मोपेड से घर लौटने लगे।इसी दौरान 3 बजे करीब 9–10 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया, चोरी का आरोप लगाया और बिना कुछ सुने बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। परिजनों के अनुसार भीड़ ने उनके हाथ-पैर बाँध दिए और लगातार पिटाई करती रही, जिससे वे खड़े होने लायक भी नहीं बचे।

पुलिस ने बचाया, पर इलाज में हुई देरी ?

सूचना पर पुलिस पहुँची और उन्हें कोलेबिरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। परिजनों का आरोप है कि प्राथमिक उपचार में भारी लापरवाही बरती गई,मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट नहीं दी गई,उन्हें रात 10 बजे तक थाने में ही बैठाए रखा गया,परिवार ने गंभीर हालत देखते हुए बेहतर इलाज की गुहार लगाई, लेकिन अनुमति नहीं मिली।

22 नवंबर को अचानक बिगड़ी हालत

22 नवंबर को हालत बेहद बिगड़ गई। थाना परिसर से बाहर निकलते ही वे गिर पड़े और नाक से तेज़ खून आने लगा।
इसके बाद उन्हें कोलेबिरा अस्पताल,वहाँ से सिमडेगा सदर अस्पताल फिर रिम्स, रांची
रेफर किया गया। रिम्स पहुँचने के सिर्फ 30 मिनट बाद उनकी मौत हो गई।

परिजनों ने उठाए कई सवाल

परिजन इसे मात्र दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता और भीड़ की हिंसा से हुई मौत बता रहे हैं।

उनके अनुसार मुख्य सवाल हैं:

क्या यह भीड़ की हिंसा का मामला है ?

पुलिस ने समय पर उचित निर्णय क्यों नहीं लिया ?

मेडिकल टीम ने गंभीर हालत में रेफर करने में इतनी देरी क्यों की ?

क्या समय पर इलाज मिलता, तो जान बच सकती थी ?

इंसाफ की मांग, कार्रवाई की अपेक्षा

मृतक के परिवार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों में भी गहरा आक्रोश है और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

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